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Wednesday, 19 December 2018

Funeral Business The business of death

The business model of death

Funeral business 

         याने लोगो का अंतिम संस्कार उनके मरने के बाद उनकी मर्जी के हिसाब से करना. आजकल की fastlife और रिश्तों की दुरी के चलते इसकी जरूरत दिन ब दिन बढती जा रही है
        Humanity आज कि जरूरत है लेकिन आजकल वो कही खो सी गई है. इक इंसान इक कंपनी प्रस्थापित करता है. लेकीन उस कंपनी का उद्देश business कम और  मानवता धर्म निभाना ज्यादा है.
       आज का मानव निहायती स्वार्थी है. अपने मतलब के सिवा वो किसी कि मदत नही करता. इक जमाना था जब लोग गांव में थे रहते इक दुसरे हालात पुछते थे. बहोत दिन कोई इंसान दिखा नही तो उसके हालात पुछने जाते थे. लेकिन आज शहर कि इस fastlife  में बाजूवाले फ्लॅट मे कौन रहता है ये भी हमें मालूम नही रहता. हालचाल पूछना दुर कि बात है. ऐसे में बाजूवाला इंसान मर गया तो हमें पुलिस आने के बाद ही पता चलता है.
       हाल ही में पेपर में न्यूज आयी थी.  मुंबई के पाॅश इलाके में इक बुजुर्ग महिला अपने आलीशान फ्लॅट मे मृत पाई गयी. उसके मरने की खबर पंधरा-बीस दिन बाद लोगों कों मालूम हुई तब तक वो कंकाल बन चुकी थी. उसका बेटा बाहर देश में बहोत बडे औदे पर काम करता है. लेकिन उसे भी खबर नही थी. इस वाकियात इक बात स्पष्ठ है कि इंसान चाहे कितना भी पैसा कमा ले उसके अंतिम संमय में वो पैसा उसके काम आयेगा इसकी कोई गारंटी नही. वही दुसरी ओर  अपने अच्छे समय वो किसीकी मदत करे, कोई भलाई का काम करे, आदमी जोडे वही उसके काम आयेगा.
      आज ये पोस्ट मै इसलिए नही लिख रहा हूं क्योंकि ये इक business है, बल्की इसलिए लिख रहा हूं क्यों कि इक इंसान अगर सच्चे मन से किसी कि मदत करना चाहे और मानवता धर्म निभाना चाहे तो उसके विचार कितने महान हो सकते है और दुसरा उद्देश ये कि इक businessman कि सोच कैसे creative होनी चाहिए. आज ऐसे ही मानवता वादी और crative विचारों वाले इंसान श्री. संजय रामगुडे सर के बारे मे मै कहना चाहूंगा जो कि 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' के founder है. ये कंपनी उन्होंने 2014 मे बनाई थी.
      आज का इंसान सिर्फ पैसे के पिछे भागता है और सिर्फ खुद के बारे मे सोचता है. उसके लिए वो जितना जिम्मेदार है उतने जिम्मेदार शायद हालात भी है. आज प्रायव्हेट कंपनी में जाॅब करनेवालों को खुद बिमार पड जाये तो छुट्टी नही मिलती. तो औरों के सुख-दुख के लिए छुट्टी मिलना तो दूर कि बात है. इसलिए समाज व्यवस्था से इंसान दूर चला जा है. आज कि पिढी अंतिम संस्कार जैसे चिजों से दूर भागती दिखाई देती है.  मरने के बाद इंसान का मानसन्मान कायम रहे इसलिए संजय रामगुडे सर ने इस कंपनी कि स्थापना कि है.
         
Funeral Business



                                      
   संजय रामगुडे सर इक सिनेमॅटोग्राफर है. वाराणसी में वो इक डाॅक्यूमेंट्री फिल्म बनाने गये थे. उन्होंने गंगाघाट पर होनेवालो इंसानों के अंतिम संस्कार किस तरह से होते है वो देखकर उन्हे बडा दुख हुआ. उसी वक्त उनके मन मे इक सतविचार आया और 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' कि योजना शुरू हुई.
     अंतिम संस्कार करनेवाली कोई कंपनी भी हो सकती है ये विचार इक सिर्फ इक creative mind में ही आ सकता है. फिर अपने मित्र के सहयोग से उन्होंने इसका सर्वे किया. बहोत सालो पहले ऐसी कंपनी बाहरदेश मे थी उनका स्टडी उन्होंने किया हजारों लोगो के साथ उन्होंने चर्चा कि. बहोत सारे लोगों के positive replay आये. लोगों की psychology स्टडी करने के बाद किन सेवाओं उन्हें जरूरत है उसका अभ्यास करने के बाद शुरू हुई 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' कंपनी. फिलहाल ये मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में कार्यरत है. थोडे दिनों मे पुरे देश में इसका विस्तार होगा.
     इसके लिए सुखांत ने मोक्ष नाम का प्री-प्लान लाया है. जिस में खरीदनेवाले के ईच्छा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाता है. उसके साथ उसका birthday, marriage anniversary और उसके जिवन के सुनहरे पल सुखांत celebrate करता है.उस आदमी के करीबी दोस्त और रिश्तेदारों को उसके सुख-दुख के क्षण बुलाया जाता है.
    अंतिम संस्कार के लगनेवाली सारी चिजें विधी प्रक्रिया सुखांत के माध्यम से पुरी कि जाती है. किसी आदमी ने मृत्युपूर्व कोई नेत्रदान या देहदान या कोई शरीर के हिस्से कि दान करने की ईच्छा रख्खी हो तो वो भी पुरी कि जाती है. श्मशान मे मृत्यु रजिस्टर से लेके अस्थीविसर्जन तक और बाद मे death certificate तक सारी व्यवस्था सुखांतद्वारे कि जाती है. खास बात ये है कि श्मशान मे श्रद्धांजली के वक्त मृतक के जिवन पे बनी videofilm द्वारा उपस्थित लोगो को और नई पिढी को अच्छा संदेश दिया जाता है. जिसने ये मोक्ष प्लान खरीदा है उसके पसंद कि उसिकी फोटो फ्रेम उसके रिलेटिव्ह को दि जाती है. अगले तीन साल तक उसकी जयंती और पुण्यतिथी सुखांतद्वारा मनाई जाती है.
    जो लोग चाहते है कि अंतिम संस्कार उनके मर्जि से हो और उनके रिलेटिव्ह को कोई तकलिफ ना हो वो लोग ये प्लान ले सकते है. जो पच्चास साल के उपर हो, जिनके बेटे परदेस में सेटल हो गये है, जिनके कोई बेटे नही, जो अकेले रहते है, जो सधन है लेकिन ऐसी विधी करना नही जानते ऐसे लोग ये सेवा ले सकते है.
     इस तरह से ये  funeral business करके आप business के साथ साथ लोगो कि सेवा भी कर सकते हो और मानवता धर्म भी निभा सकते हो और समाज कि सेवा भी कर सकते हो.




सत् विचार मोती

 वो ज्ञान ही क्या जिस से सिर्फ जिवनकाल चले, ज्ञान तो वो जिस से मानवजन्म का उद्देश सार्थ हो.