business set up tips.money making ideas.how to become entrepreneur .businness basic information. business coats motivational stories all about your business ideas

Thursday, 18 October 2018

दशहरा( विजयदशमी ) विजय अपने आप पे

       

        दशहरा  (विजयादशमी या आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है. भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया . इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता . इसीलिये इस दशमी को 'विजयादशमी' के नाम से जाना जाता है. (दशहरा = दशहोरा = दसवीं तिथि). दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है. इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं. (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि).इस दिन लोग नया घर खरीदना, नई गाड़ी लेना,सोना ओर जेवर खरीदना ये सब शुभ मानते है. ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती . प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रणयात्रा के लिए प्रस्थान करते थे. कहते है इसी दिन पांडवोंने अपने शस्त्र जो की शमी के वृक्ष पर छिपाए थे बनवास के दौरान, उन्हे निकालकर उनकी पूजा की थी इसलिए भी आयुध-पूजा करते है. सारांश ये है की विजयादशमी एक विजय दिवस है इस दिन शुरू किए कार्य मे सफलता ज़रूर मिलती है.
                                         
dussera vijayadashami victory on myself

        दशहरा (विजयदशमी )याने विजय अपने आप पे
          
        विजयादशमी   याने विजय पाना है अपने दश इन्द्रियो पर. इंसान का शरीर दश इंद्रियो से बना है, अगर हर इंसान अपने इन दश इंद्रियो पे काबू पा लेगा तो एक सतचरित्रवान इंसान पैदा होगा. ऐसे इंसान से एक घर, घर से एक गाव,गाव से जिला,जिले से स्टेट,स्टेट से देश ही सत् विचारक और सतचरित्रवान बन जाएगा. और satvichar.com का ये सपना है की सारी दुनिया सत् विचारक और  सतचरित्रवान बन जाए.

       हमारे इंद्रियो का खेल भी देखो सुबह हमारे पैर office निकलते है, शाम को वही पैर beer baar जाते है. office जाते वक्त रास्ते मे मिले भिकारी को हमारे हात दस रुपये देते है,शाम को उसी beer baar मे किसी अंजाने को हमारे हात दो थप्पड़ देते है. office में दिन भर laptop पे हमारी आँखे excel sheet बनाती है, उसी वक्त बाजू की टेबल पर बैठी महिला सहकारीको बुरी नज़रसे भी देखती है. सुबह हमारे कान भजन भक्ति संगीत सुनते है,वही कल किसी का कुछ बुरा हुआ तो आज उसका क्या हाल है, ये सुनने के लिए भी कान तरसते है. दूसरे लोगो के दुख मे हमे खुशी मिलती है. सुबह हम किसी को Good Morning बोलते है तो शाम को किसी को गन्धि गन्धि गलिया देते है. कभी कभी हम कल के सुनहरे सपने देखते है तो दूसरे क्षण किसी चिंता के कारण मन मे आत्महत्या के विचार भी आते है.

        तो देखो हम एक क्षण अच्छा काम करते है तो दूसरे क्षण बुरा काम करते है. अच्छा और बुरा दोनो विरोधी काम करने के लिए हम एक ही इंद्रिय का इस्तेमाल करते है. इन इंद्रियो पर विजय पाना ही सही विजयदशमी ( दशहरा- दस इद्रीयों हरा देना उनको काबू में कर  लेना ) है. हमेशा अच्छा काम करना अच्छा विचार करना ही इन इंद्रियो पे विजय पाना है. काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर शक ओर चिंता इन विकारो का त्याग करना ही विजयदशमी है. सारे बुरे काम इन विकारो के कारण ही होते है. इसलिए इन्हे इस विजयादशमी के शुभ अवसर पर त्यागना है.

      इन इंद्रियो पे विजय पाना आसान नही है. इसलिए भगवान की भक्ति की ज़रूरत है. ये भगवत भक्तीरूपी दुर्गा देवी माॅ ही इस महिषासुर ( अष्ट-विकार काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर शक ओर चिंता ) का नाश करेगी.
      
      भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था. आज के इस कलयुग मे राम भी हम है ओर रावन भी हम ही है. हमारे विचार जब अच्छे हो हम राम है, हमारे विचार जब गलत हो तब हम ही रावण है. इसलिए आज अपने अच्छे विचारों ( राम ) से बुरे विकारों का ( रावण ) वध कर दो, तो सच में रावण का वध हो जायेगा.
        
       विजयादशमी  याने के दशहरे के दिन आयुध पूजा या शस्त्र-पूजा करते है. क्यों की उसी शस्त्र से हम अपने शत्रू पर विजय प्राप्त कर सके. इस कलयुग मे ना हमारे पास कोई शस्त्र है ना हमे कोई शत्रू दिखाई पडता है.लेकीन इस कलयुग मे अब हमारे इंद्रीय ही हमारे शस्त्र है और ये अष्टविकार ही हमारे शत्रू है. हमें इन इंद्रियरूपी शस्त्रों से अष्टविकाररूपी शत्रू पर विजय प्राप्त करनी है.

        कोई भी धर्म या धर्मग्रंथ की सिक तो मानवता ही होती है. सत् विचार  ,सत् आचार और सत् कर्म ही मानवता के प्रमुख सूत्र है. जिस दिन हम अपने दशइंद्रीयों पर विजय पायेंगे ये चिजे हम मे अपने आप आ जायेंगी और मानवता धर्म आपने आप फलने फुलने लगेगा और सारी दुनिया सुख शांती से भर जायेगी. उस दिन सही मायने मे विजयादशमी(दस इंद्रीयों पर विजय) मनाई जायेगी.
         
       आज दुनिया में इतना अज्ञान भरा पडा है की लोग धर्म और अधर्म के पथ को पहचान ही नही पाते. इसलिए अधिकांश लोग अधर्म की पथ पर चल पडते है.
         
        हम कोई ज्ञानी पंडित तो है नहि. रोज-मर्रा की जिंदगी से जो सीखते है, अनुभव करते है, देखते है उसी को विचार के रूप मे प्रगट करते है. इस मे कुछ ग़लती हो जाए तो क्षमा कीजिए.
           
          आप सभी को दशहरा और विजयादशमी की हार्दीक शुभकामनाऐं.