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Thursday, 27 September 2018

COMPANY REGISTRATION INFORMATION FOR BUISINESS STARTUP

             
               हाय फ्रेंड्स कोई बिजनेस या कंपनी शुरू करने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन करना बहोत ज़रूरी होता है.जिस मे कुछ खास चीज़ो का ध्यान रखना पडता है.जैसे सरकार  को टॅक्स देना पड़ता है. अगर प्रॉपरायटर बिज़्नेस मे कुछ घाटा हो जाए तो वो रिकवर करने के लिए अपनी खुद की प्रॉपर्टी भी यूज़् करनी पडती है.प्रायवेट लिमिटेड कंपनी मे ये रिस्क कम होती है. कुछ कंपनी मे बहोत सारे रेकॉर्ड रखने पड़ते है, जैसे आप कोई फुड प्रॉडक्ट बना रहे हो तो उसके लिए आप को FSSAI का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है,कोई प्लास्टिक प्रॉडक्ट है तो उसके लिए कुछ अलग सा डॉक्युमेंटेशन होते है. BRC/IOP ओडिट होते है. और सबसे महत्वपूर्ण बात कमणी की ग्रोथ जिस मे आपके कस्ट्रमर प्रॉडक्ट पब्लिसिटी ओर बहोत सारी बाते जो हम पहले भी डिस्कस कर चुके है.
         
                               
compani registration information for buisiness

           COMPANY REGISTRATION FORMATE

  •  SOLE PROPRITERSHIP - सोल प्रॉप्ररिटेर यानी की आप खुद उसके मलिक यानी की दूसरा कोई नही. ये कोई खास रेजिस्ट्रेशन नही होता. आप जिस एरिया मे रहते हो चाहे हो नगरपरिषद हो ग्राम पंचायत वाहा से आपको एक सर्टिफिकेट लेना पड़ता है या फिर GST रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है  ओर हर साल टॅक्स भरना पड़ता है बस. ये बिजनेस स्टार्ट करने मे आसान होते है. ग्रोसरी शोप से लेके  सलूण तक सारे बिजनेस इसमे आते है इसका फ़ायदा यह है की जो भी डिसिशन लेना है आप को ही लेना हैलेकिन नुकसान ये है की जो भी फ़ायदा नुकसान होगा वो आप का होगा. इस मे कोई इन्वेस्टर नही मिलताजो भी फाइनान्स लगाना है वो आप को ही मॅनेजकरना है

       

  •  GENERAL PARTNERSHIP-एक से ज़्यादा जिस बिजनेस मे पार्ट्नर हो उसे जनरल पार्ट्नरशिप कहते है इस मे ज़्यादा से ज़्यादा 20 पार्ट्नर होते है. इस पार्ट्नरशिप को रिजिस्टर करना पड़ता है उसे PARTNERSHIP DID कहते है. उस मे पार्ट्नर की इनवेस्टमेंट ओर प्रॉफिट की हिस्सेदारी तथा काम के बारे मे पूरी जानकारी लिखित रूप मे होती है. इस मे सबसे ज़्यादा नुकसान वाली यही बात होती है की आगर नुकसान हो जाये तो हो भी सब मे उसी हिसाब मे आ जाता है.

         

  •   LIMITED LIABILITY PARTNERSHIP -लिमिटेड लाइयबिलिटी जनरल पार्ट्नरशिप जैसी ही होती है. इस मे ज़्यादा से ज़्यादा 50 ओर कम से कम 2 पार्ट्नर होते है.जनरल पार्ट्नरशिप मे कुछ प्राब्लम हो जाए तो सब पार्ट्नर कंट्रिब्यूट करते है लेकिन इसमे वो लिमिट जरा कम है. इस डॉक्युमेंट्स कम होते है. इस मे कॅपिटल कम लगता है. शेर होल्डर  के प्रॉफिट पे टॅक्स नही लगता. ये अभी नया फॉर्मॅट है. कंपनी का नाम अप्रूव्ड होने के बाद उसे Ministry of Corporate Affair मे फाइल करना पड़ता है. पार्ट्नर अफिडेविट ओर डिक्लरेशन ,मेमोरॅंडम ऑफ असोसियेशन,सबस्क्राइबर शीट ओर रिजिस्टर्ड ऑफीस अड्रेस ये सब डॉक्युमेंट्स लगते है. 
         

  •  PRIVATE LIMITED- प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा ये है की इसमे आप इन्वेस्टर ले सकते हो. इसमे आप की लाइयबिलिटी लिमिटेड होती है. जितना आप का शेअर है उतना ही आप फ़ायदे ओर नुकसान के ज़िमेदार है.इस मे ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनवेस्ट करते है. इसका एक फ़ायदा है की अगर डाइरेक्टर बाहर भी जाएगा तो भी कंपनी चालू रहती है. इस मे डॉक्युमेंट्स बहोत ज़्यादा होते है. हर तरह की लीगल बातो का द्‍यान रखान पड़ता है.बहोत सारे ऑडिट होते है. इस मे टॅक्स ज़रा ज़्यादा होता है. आपके डीवीदेंट प्रॉफिट पे भी आप को टॅक्स देना पड़ता है. एक आदमी भी लिमिटेड कंपनी शुरू कर सकता है. मिनिमम कॅपिटल इनवेस्टमेंट करना पड़ता है,उसका मिनिमम लिमिट 1 लाख है. बॅंक लोन ओर फंड जमा करने के लिए ये बेस्ट तरीका है.
  •  ONE PERSON COMPANY( OPC)- SOLE PROPRITER फॉर्मॅट का ये ADVANCE रूप है. इस मे सिर्फ़ एक ओर एक ही आदमी होता है ओर सारे शेर्स एक ही आदमी नाम होते है.COMPANY ACT के अनुसार 2013 मे फॉर्मॅट लागू दिया . ईश मे ज़्यादा से ज़्यादा 15 डाइरेक्टर रख सकते है.PAID UP CAPITAL की CAPACITY 50 LAKH ओर TURN OVER 2 CR.है ये लिमिटेशन CROSS होने के बाद ओर दो साल पूरे होने पर इसको प्राइवेट या पब्लिक कंपनी मे CONVERT होना ही पड़ता है. ये इक प्राइवेट कंपनी है ओर इसको अपने नाम के आगे ( OPC ) लिखना पड़ता है. इक इंडियन सिटिज़न जो की इंडिया का रेसिडेंट हो ये कंपनी बना सकता है. नॉमिनी के लिए भी यही कंडीशन है. नॉमिनी माइनर ना हो.

            अगर आप कोई पार्ट्नरशिप करना चाहते हो तो हमेशा अछा पार्ट्नर चुने जिसे कोई बुरी आदत ना हो ओर जो लालची ना हो. उसकी सामाजिक प्रतिमा अच्छी हो.
             उपर दिए हुए सारे काम आप कोई अच्छे CA या CS से करवाए ताकि कोई कमी ना रह जाए ओर बाद मे कोई प्राब्लम ना खड़ी हो.