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Friday, 18 January 2019

January 18, 2019

world happiness report 2018

   World happiness report 2018

   India is the most depressed country in the world - WHO

  जी हा WHO के  report  के अनुसार India दुनिया का बहोत ज्यादा depreessed देश है. यहा लोग हमेशा depress रहते है. WHO के इक report के अनुसार पिछले दस साल मे corporate employees मे anxiety और depression  का rate 45-50% बढ गया है. मतलब दो मे से इक आदमी depression का शिकार है. हांलाकी बहोत सारी कंपनिया अपने employees के anxiety और depression के लिए special doctor भी appoint करते है.
   लेकिन ऐसी क्या बाते हो जाती है कि लोग depression का शिकार हो जाते है ? workload और job insecurity ये इक दो कारण छोड के और ऐसे कौनसे कारण है जो इन हालात के जिम्मेदार है. ये बात और है की आज का corporate picture बदल गया है. पहले कंपनी के owner सिर्फ नाम के होते थे असली owner तो employee ही होते थे. owner और employee में  इक अलग relation था.
world happiness report 2018

   इस anxiety और depression का main कारण है. rat-race. जी हाॅ rat-  race. आज इक अजिबोगरीब rat- race लगी हुई है और हमे पता भी नही चलता कि हम इस रॅट रेस का हिस्सा है. आज माॅ-बाप अपने बेटे को Lower KG में डालते है तो उसके कान में बता देते है कि बेटा 12th मे 90% लाना इंजिनिंरीग मे जाना है. बस यही से शुरू है उसकी रॅट रेस. फिर जिंदगी मे हर इक मोड पर अपने को बेहतर बनाने के चक्कर मे वो depression का शिकार हो जाता है. आज हर एक आदमी ज्यादा पैसा,नाम और पाॅवर के पिछे भागता दिखाई देता है. और ये शायद हर इंसान की आदत भी बन गई है और ये सब ना मिलने पर depression आना तो  स्वभाविक है.

    आज social media भी depression का इक अहम कारण है. वैसे social media इक दुसरे से connect रहने के लिए अच्छा माध्यम है लेकिन इसका गलत प्रभाव पडता दिखाई देता है. इसकी वजह से आज कल कि generation physical और ground game खेलना भूल सी गई है. हमेशा mobile और computer पे online रहने के कारण वो physically और mentally कमजोर हो गये है और social media addicted हो गये है.  Facebook,Instagrame, और tweeter पे किसकी सेल्फी और पोष्ट को कितने लाईक मिले, उस से  मुझे कैसे ज्यादा लाईक मिलेंगे? इसकी भी आप को इक  rat-race देखने को मिलेगी. जो आदमी social media पर अपने आप को जितना smart और active दिखाता है उतना वो असल जिंदगी में होता नही. हम उसी को सच मान के नर्वस हो जाते है. कोई इंसान अपने पार्टी की सेल्फीज, नई गाडी की सेल्फीज या फिर किसी बाहर देश के लोकेशन पर खिंची सेल्फीज जब social media पर अपलोड करता है तो हम सोचते है यार इसके life मे कितनी enjoy है हमारे पास कुछ भी नही. social media पर खुश दिखनेवाला आदमी real life मे खुश होगा इसकी कोई गॅरंटी नही. हम हमेशा दुसरे के पास जो चिज है वो पाना चाहते है. वो ना मिलने से नर्वसनेस आता है और वो डिप्रेशन में बदल जाता है.

    United Nation Sustainable Report

       India is not even on the list of top 100 happiest countries out of the list 156. India rank is 133.
    इस साल  UN  के world happiness report के अनुसार 156 देशों मे India का rank 133 है. इक अफगणिस्तान को छोडकर पाकिस्तान,बांग्लादेश,नेपाल,भूटान,और श्रीलंका ये अपने पडोसी देश जो कि development मे हम से बहोत पिछे है,लेकिन happiness मे हम से आगे है. ये report हर आदमी income, social support, health facility, freedom, population, corruption पे बनाई गयी है.

    हर किसी के खुशी के फंडे अलग होते है. बुजुर्ग लोगों को respect देने से या उनके पैर छुने से खुशी मिलती है,यंगस्टर को मोबाईल,बाईक,कार खरीदने से खुशी मिलती है, उनको love वाला प्रपोज accept होने से भी बहोत ज्यादा खुशी मिलती है.किसी को घुमने फिरने से नई नई site seeing से भी खुशी मिलती है. बच्चों को चाॅकलेट,खिलोने तो क्या अपने मम्मी पप्पा को देखने से भी खुशी मिलती है.

    खुशी कही से भी मिलती है बस लेना आना चाहिए. फिर life में ये टेंशन क्यों? ये depression क्यों? ये rat-race क्यों? ये race लगाना ही है तो अपने आप से लगाओ. खुद को दुसरे से बेहतर मत बनाओ. खुद को अपने आप से बेहतर बनाओ.अपनी शर्तो पे जिओ. वही करो जिसमे तुम्हे खुशी मिलती हो.दुसरो की खुशी देखकर उन से race लगाओगे  तो depression के सिवा कुछ नही पावोगे. क्यों कि हर इंसान अलग होता है. सबको सब कुछ नही आता लेकिन किसी को कुछ तो आता है. ये आपका कुछ है ना वही आप कि खुशी है.

   आज सारी दुनिया depression और stress कम करने के लिए योग के पिछे भाग रही है जब कि योग का जन्मदाता है अपना भारत देश. और उसी कि ये हालत है.भगवान का नाम लेने से, सत् विचारों और सदाचार से भी बहोत खुशी मिलती है. बस शर्त यही रहेगी आप को अपना अहंकार त्यागना पडगा. ये अहंकार ही depression का मेन कारण है.राम का नाम लिया तब हमने पृथ्वी पर जन्म लिया,जिंदगी का आखरी सेकंड वही रामनाम हमारे मुख में हो. यही तो है life. बाकि हमने कितना पैसा कमाया,नाम कमाया वो तो साथ नही जानेवाला.
    मै आशा करता हूं कि 2019 के WHO के  report में भारत का depression rate कम हो और UN कि report में भारत दुनिया में सबसे खुशहाल राष्ट्र हो.
   जय हिंद.
                                                                                                                

Friday, 4 January 2019

January 04, 2019

Making a brand name and brand positioning

      Making a brand name and brand positioning - Brand name और brand positioning किसी भी business के लिए बहोत important होता है. business की ग्रोथ के लिए ये बहोत जरूरी होता है.

       मै अपने पहले पोस्ट लिख चूका हू कि किस तरह हमारी industrialization की  branding न होने के कारण हमारी देश कि बनी चिजे international market मे तो क्या अपने देश मे भी टिक नही पाई. तो आज हम देखेंगे brand मतलब होता क्या है.
Making a brand name and brand positioning

Making a brand name and brand positioning


      जनरली start-up business करनेवाले 'Logo' को ही brand समजते है. brand का मतलब किसी भी कंपनी के product पे दिखाया गया लोगो का विश्वास होता है. मतलब कोई नहाने का साबून बोलेगा तो Lux, Pears या Lifeboy  का ही नाम सामने आता है. लेकीन Indian brand की Medimix  भी अच्छा होता है. Lux बडा brand है. लेकिन Medimix का ज्यादातर लोगो को मालूम भी नही रहेगा. जब कि वो इक आयुर्वेदिक बिना केमिकल मिश्रीत साबून है. मै  अपनी पिछली पोस्ट डोमिनोज के बारे मे लिख चूका हू. अगर हम किसी को पुछे कि डोमिनोज किस चिज के लिए फेमस है तो सब जवाब देंगे पिझ्झा के लिए.लेकिन पिझ्झा तो पिझ्झाहट और पापाजाॅन का भी अच्छा होता है, लेकिन डोमिनोज फेमस है 30 मिनट के अंदर डिलिव्हरी करने के लिए. उनका श्लोगन यही है 'खुशियों कि होम डिलीव्हरी', '30 मिनिट में होम डिलिव्हरी.' वो टाईम पे ज्यादा फोकस करते है. उन्होंने लोगो कि जरूरत पर ज्यादा ध्यान दिया. किसी भी business में कुछ अलग करने कि जरूरत होती है. क्योंकि वो बडा brand बन पाये और अपने brand कि market मे इक position बना पाये.
  
   कभी कभी इक अच्छा श्लोगन भी business के लिए game changer साबित होता है. आप दखिए बडे बडे brand का कोई ना कोई श्लोगन या टॅगलाईन जरूर होती है. जैसे,
NIKE - Just do it,
Apple - Think different,
BMW - Altimate  driving machine,
Amul - atterely butterly delicious,
Coca Cola - थंडा मतलब कोकाकोला.
Kingfisher - King of good times.
Mentos - दिमाग कि बत्ती जला दे.
Raymond - The complete man,
Surf excel - दाग अच्छे है.
   ऐसे श्लोगन से कस्टमर के दिमाग मे वो brand फिट बैठता है और वो वही खरीदता है.

LOGO

   किसी भी product का Logo भी बहोत मायने रखता है. Logo आपके business का चेहरा होता है, आपकी पहचान होती है. कभी कभी लोग Logo से ही product के brand कि असली और नकली की परख करते है.

 आजकल आप देखेंगे कि  बडे बडे कंपनियोंने अपने लोगो बदल दिये है. आजकल के कस्टमर के बदलती demand  और उन्हे attract करने के लिए तथा कंपनी के product में जो बदलाव किए गये उनके के प्रदर्शन के लिए नये Logo लान्च किए गये है.
  Logo पाच भागो मे divide होता है.
1) background.
2) size.
3) colour.
4) structure.
5) nature.
   Example के लिए हम amazon लेंगे
1) background - black.
2) size - only 'a''.
3) colour - white/yellow.
4) structure - all side open.
5) nature - all included.

     इस मे दिखाया गया बाण a से z तक जाता है, जिस से वो ये दिखाना चाहते है कि वो सब चिजे बेचते है और black background और white/yellow से वो ये दिखाते है की वो कोई भी भेदभाव नही करते.

     Logo बनाने से पहले वो क्यो होना चाहीए, उस logo से आप क्या संदेश देना चाहते है और किस चिज को टारगेट करना चाहते है ये सब बातों का पहले हि विचार करना जरूरी होता है. ये सब चिजे start-up मे ही क्लिअर होनी चाहिए.

LABAL POSITIONING

    हमारे गाव मे चावल कि खेति अच्छी होती है और यहा पोहा बनानेवाले बहोत सारे लोग है. वो लोग पोहा 40 रूपये kg से इक लोकल  mall मे बेचते है और वो mall वाला 54 रूपये kg से अपना लेबल लगा के लोगो को बेचता है. वो ये नही देखता कि पोहा आता कहा से है. उसको 40 रूपये अच्छा पोहा मिल जाता है बस. लोग भी उसका brand देखकर खरीद लेते है. इसको लेबल पोजिशिंनिग कहते है. ये होते है brand के फायदे.

   आज LG भारत मे नंबर वन होम अॅपलासेंस बनानेवाली कंपनी है. 1997 मे जब LG हमारे देश मे आया था तो उन्होंने कहा था," हम पहले brand बनाते है बाद मे कंपनी डालते है." ये बहोत सोचनेवाली बात है. LG हमारे देश कि कंपनी से ही product बनवाके लेती थी और अपना लेबल लगा के बेचती थी. 2005 मे महाराष्ट्र के रांजनगाव मे उन्होंने पहली खुद की कंपनी बनाई तब LG brand बहोत बडा हो चुका था. लोग आँख बंद करके उस पे विश्वास रखते है. ये होती है brand कि पाॅवर.

   आज जो भी लोग start-up कर रहे उन्हे brand पर बहोत सिरीअसली सोचना चाहिए. branding को daily update करने कि जरूरत होती. चाहे वो किसी भी माध्यम से. advertisement से या promotion से हो  लोगो के मन मे जगह बनानी पडती है.कस्टमर कि demand और उसकी service ये दो चिजे बहोत important होती है. आज आप किसी चिज का start-up कर रहे हो उसमे जो कोई भी बडा brand होगा तो वो बडा brand क्यो है, उसने ऐसा क्या किया कि वो बडा brand बन गया इसका study करना जरूरी है. आप का brand भविष्य मे कैसा होगा उसकी positioning कैसी होगी इसकी शुरूवात start-up मे ही करनी चाहिए.
  




Wednesday, 26 December 2018

December 26, 2018

Indian Market World's Selling Centre

 

Indian Market World's Selling Centre 

आज अपना भारत देश और Indian market सिर्फ बाहरी देश का इक बहोत बडा  market बन के रह गया है. अपने देश के लोग ज्यादातर बाहरी देश brand पसंद करते है, ज्यादातर युवा. बाहरी देश का brand युज करने को वो style और status मानते है. अच्छी पढाई लिखाई कर के वो multinational company मे जाॅब पाना चाहते है. लेकिन खुद का business खुद का Indian brand बनाना ये बहोत कम युवा सोचते.


Indian Market World's Selling Centre



            हम और  foreign brand

   आज का युवा सुबह उठता है तो Samsung,Apple,LG की फोन कि आलार्म से फिर Colgate की toothpest और brush से ब्रश करेगा फिर Gillette के शेवर से शेव करेगा और Dettol का अॅन्टोसेफ्टिक लगायेगा. Lux या pears साबून से नहायेगा फिर Jocky की अंडरविअर पहनेगा Petter England का शर्ट पहनेगा,Blackberry कि पॅन्ट पहनेगा Unilever brand कि कोई चाय या काॅफी पियेगा उसके साथ Britania का ब्रेड या चिज खायेगा नही तो Kellogs या Maggi तो होती ही है नाष्ते मे. नाष्टा करते समय Samsung, LG के LED पर CNBC या BBC या फिर STAR SPORTS या ESPN चॅनल देखेंगे उसके बाद PUMA, ADDIDAS के शूज या Bata के जूते पहनकर  rayban का गाॅगल लगाकर, i10, i20 या कोई और foreign brand कि कार लेकर ऑफिस जायेंगे.ऑफिस मे Apple DELL,LG या SAMSUNG के लॅपटाॅप पे MICROSOFT और GOOGLE के साथ आठ घंटे काम करेंगे शाम को PIZZA या DOMINOZ का Pizza लेके आयेंगे साथ में FOSTER के दो बिअर भी लायेंगे बिअर पियेंगे pizza खायेंगे फिर SONY, SAMSUG ,LG केLED पे CNBC BBC ESPN चेनल देखेंगे.LG, SAMSUNG का AC लगायेंगे और सो जायेंगे फिर सुबह SAMSUNG, LG के फोन के आलार्म के उठ जायेंगे.
   ये है आज के युवावो का दिनक्रम और lifestyle with status. पूरे दिन में हम इक भी वस्तू made in india यूज नही करते और हमारा सारा पैसा brand के नाम पर बाहर देश चला जाता है.( बचा कुचा नेते लोग खा जाते है.) बाहर कि कंपनिया यही अपने देश में हि प्राॅडक्ट बनाती है और यही हमे ही बेचती है और हम इन बाहरी चिजे यूज करने में अपना status मानते है. हम और हमारा देश इक contract manufacturer बन के रह जाते है.





देश के लिए हमे क्या करना चाहिए

   1991 मे भारत मे खुली अर्थ व्यवस्था लागू कर दि गयी जिसके हमे फायदे भी बहोत हुए. industrialization बढ गया,लोगो को रोजगार मिलने लगे हमारा economy स्थर भी बढ गया लेकिन इसके नूकसान भी बहोत सारे है जो अभी दिखाई नही देते.
    पहले Onida और Videocon के TV घर मे होना शान कि बात थी आज Onida और Videocon के TV कोई नाम लेता नही.  उनकी जगह Sony,Samsung और LG ने ले ली है. अॅम्बेसिडर,प्रिमीअर पद्मिनी इन कारों कि जगह Ford,Nissan,Hyundai,Skoda, BMW ने ले लिया.दुरदर्शन कि जगह BBC ESPN  ने ले ली. BAJAJ के प्राॅडक्ट की जगह LG के प्राॅडक्टोने ले ली. मफतलाल के कपडे कि जगह PETER ENGLAND, LEVIS,BLACKBERRY ने ली.
    इस बदलाव के कारण हमारी आर्थिक उन्नती जैसी होनी चाहिए थी वैसे हुई नही. हमारे देश मे हम से हि प्राॅडक्ट बनवाकर अपना लेबल लगाकर हमे ही बेचा जाता है. इतने बडे का बदलाव के कारण तो बहोत सारे है. पहला कारण है हमारी मानसिकता. हमे देसी चिजें इस्तेमाल करने मे शरम आती है और विदेशी चिजें इस्तेमाल करने में हम style और status महसूस करते है. दुसरा मेन कारण यह है कि हमारे businessman अपने business मे कोई बदलाव नही कर पाये,ग्राहकोंकी जरूरतो को नही समज पाये. और अगर समझ पाये तो अच्छी सर्विस नही दे पाये.कोई अच्छी business  strategy नही कर पाये.
    मै उदाहरण के तौर पर micromax mobile का दूंगा. वो दुसरे नंबर का लिड ब्रॅन्ड था लेकिन बाद मे आये vivo,redmi इन कंपनियोंने online, offline और artificial shortage ये strategies अपनाकर micromax mobile को बाहर कर दिया.
   विदेशी कंपनिया भारत के किसी कंपनी को अपना पार्टनर बनाती है और इक बार मार्केट समझ में आने के बाद उसे छोडकर अपना खूद का ब्रॅन्ड मार्केट में लाती है. जैसे के Hero-Honda,Mahindra-Nissan, ऐसे बहोत सारे उदाहरण है.कल वो अलग होंगे और हम ब्रन्ड के नाम पे विदेशी चिजें खरीदेंगे और हमारा made in India ब्रॅन्ड दिखाई भी नही देगा. आज बहोत सारी चिजें China में बनती है लेकिन बेचने के लिए Indian मार्केट मे लाई जाती है. ये तो बहोत ही गंभीर हालात है क्यों कि हमें मिलनेवाला contract manufacturer का पैसा अब China चला गया और हमारा देश सिर्फ खरीदारी करने का मार्केट बन के रह गया है.
    आज जो भारतिय नागरिक business start-up करना चाहते उन्हे मेरा नम्र निवेदन है कि अपने प्राॅडक्ट का brand बनाये. वो सब strategy अपनाये जो बाहरदेश कि कंपनिया आजमाती है. जैसे Dominiz pizza वाले time strategy पर काम करते है. pizza कि आधे घंटे मे delivery करते है. कुछ mobile कंपनिया artificial shortage दिखा के sell बढाती है. अच्छा promotion करती है. cash on delivery,return policy जैसी strategy अपनाती है. customer की मानसिकता study करती है. ये आप को भी करना पडेगा. Samsung जब India में आया तब उन्होंने promotion के लिए आमिर खान को चूना क्यों कि आमिर खान का युवावो में क्रेझ था और वो जानते थे mobile का ज्यादातर use युवा ही करेंगे और देखते ही देखते Samsung India मे popular हो गया. इन छोटी छोटी बातों का आपको ध्यान रखना पडेगा इक बडा brand बनाने के लिए. उसके साथ quality भी विशेष ध्यान रखना पडता है उस मे कोई compromise नही चलता.
   सारे start-up और running businessman लोगो ऐसी कोई मुहीम चलानी चाहिए जिस से हमारे भारतिय लोग हमारी देसी brand  कि चिजे इस्तेमाल करने लग जाय. मानना पडेगा टाटा बिर्ला और Reliance को जो Indian कंपनिया आज भी India कि शान है. India के लोगो को भी मानना पडेगा क्यों कि आज भी उनका LIC पे विश्वास है. SBI आज भी India की नंबर वन बैंक है. बाबा रामदेव स्वदेशी चिजे इस्तेमाल करने के लिए आग्रह करते है. गांधीजीने जो स्वदेसी का आंदोलन छेडा था उसकी आज बहोत जरूरत है. तभी हमारा देश अव्वल नंबर पर आयेगा.
   जय हिंद.

 सतविचारमोती.

  ज्ञान और विवेक दो ऐसी आँखे है जो जिवन के सत्य और आंतरआत्मा दोनो के रूप देख सकती है.




Wednesday, 19 December 2018

December 19, 2018

Funeral Business The business of death

The business model of death

Funeral business 

         याने लोगो का अंतिम संस्कार उनके मरने के बाद उनकी मर्जी के हिसाब से करना. आजकल की fastlife और रिश्तों की दुरी के चलते इसकी जरूरत दिन ब दिन बढती जा रही है
        Humanity आज कि जरूरत है लेकिन आजकल वो कही खो सी गई है. इक इंसान इक कंपनी प्रस्थापित करता है. लेकीन उस कंपनी का उद्देश business कम और  मानवता धर्म निभाना ज्यादा है.
       आज का मानव निहायती स्वार्थी है. अपने मतलब के सिवा वो किसी कि मदत नही करता. इक जमाना था जब लोग गांव में थे रहते इक दुसरे हालात पुछते थे. बहोत दिन कोई इंसान दिखा नही तो उसके हालात पुछने जाते थे. लेकिन आज शहर कि इस fastlife  में बाजूवाले फ्लॅट मे कौन रहता है ये भी हमें मालूम नही रहता. हालचाल पूछना दुर कि बात है. ऐसे में बाजूवाला इंसान मर गया तो हमें पुलिस आने के बाद ही पता चलता है.
       हाल ही में पेपर में न्यूज आयी थी.  मुंबई के पाॅश इलाके में इक बुजुर्ग महिला अपने आलीशान फ्लॅट मे मृत पाई गयी. उसके मरने की खबर पंधरा-बीस दिन बाद लोगों कों मालूम हुई तब तक वो कंकाल बन चुकी थी. उसका बेटा बाहर देश में बहोत बडे औदे पर काम करता है. लेकिन उसे भी खबर नही थी. इस वाकियात इक बात स्पष्ठ है कि इंसान चाहे कितना भी पैसा कमा ले उसके अंतिम संमय में वो पैसा उसके काम आयेगा इसकी कोई गारंटी नही. वही दुसरी ओर  अपने अच्छे समय वो किसीकी मदत करे, कोई भलाई का काम करे, आदमी जोडे वही उसके काम आयेगा.
      आज ये पोस्ट मै इसलिए नही लिख रहा हूं क्योंकि ये इक business है, बल्की इसलिए लिख रहा हूं क्यों कि इक इंसान अगर सच्चे मन से किसी कि मदत करना चाहे और मानवता धर्म निभाना चाहे तो उसके विचार कितने महान हो सकते है और दुसरा उद्देश ये कि इक businessman कि सोच कैसे creative होनी चाहिए. आज ऐसे ही मानवता वादी और crative विचारों वाले इंसान श्री. संजय रामगुडे सर के बारे मे मै कहना चाहूंगा जो कि 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' के founder है. ये कंपनी उन्होंने 2014 मे बनाई थी.
      आज का इंसान सिर्फ पैसे के पिछे भागता है और सिर्फ खुद के बारे मे सोचता है. उसके लिए वो जितना जिम्मेदार है उतने जिम्मेदार शायद हालात भी है. आज प्रायव्हेट कंपनी में जाॅब करनेवालों को खुद बिमार पड जाये तो छुट्टी नही मिलती. तो औरों के सुख-दुख के लिए छुट्टी मिलना तो दूर कि बात है. इसलिए समाज व्यवस्था से इंसान दूर चला जा है. आज कि पिढी अंतिम संस्कार जैसे चिजों से दूर भागती दिखाई देती है.  मरने के बाद इंसान का मानसन्मान कायम रहे इसलिए संजय रामगुडे सर ने इस कंपनी कि स्थापना कि है.
         
Funeral Business



                                      
   संजय रामगुडे सर इक सिनेमॅटोग्राफर है. वाराणसी में वो इक डाॅक्यूमेंट्री फिल्म बनाने गये थे. उन्होंने गंगाघाट पर होनेवालो इंसानों के अंतिम संस्कार किस तरह से होते है वो देखकर उन्हे बडा दुख हुआ. उसी वक्त उनके मन मे इक सतविचार आया और 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' कि योजना शुरू हुई.
     अंतिम संस्कार करनेवाली कोई कंपनी भी हो सकती है ये विचार इक सिर्फ इक creative mind में ही आ सकता है. फिर अपने मित्र के सहयोग से उन्होंने इसका सर्वे किया. बहोत सालो पहले ऐसी कंपनी बाहरदेश मे थी उनका स्टडी उन्होंने किया हजारों लोगो के साथ उन्होंने चर्चा कि. बहोत सारे लोगों के positive replay आये. लोगों की psychology स्टडी करने के बाद किन सेवाओं उन्हें जरूरत है उसका अभ्यास करने के बाद शुरू हुई 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' कंपनी. फिलहाल ये मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में कार्यरत है. थोडे दिनों मे पुरे देश में इसका विस्तार होगा.
     इसके लिए सुखांत ने मोक्ष नाम का प्री-प्लान लाया है. जिस में खरीदनेवाले के ईच्छा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाता है. उसके साथ उसका birthday, marriage anniversary और उसके जिवन के सुनहरे पल सुखांत celebrate करता है.उस आदमी के करीबी दोस्त और रिश्तेदारों को उसके सुख-दुख के क्षण बुलाया जाता है.
    अंतिम संस्कार के लगनेवाली सारी चिजें विधी प्रक्रिया सुखांत के माध्यम से पुरी कि जाती है. किसी आदमी ने मृत्युपूर्व कोई नेत्रदान या देहदान या कोई शरीर के हिस्से कि दान करने की ईच्छा रख्खी हो तो वो भी पुरी कि जाती है. श्मशान मे मृत्यु रजिस्टर से लेके अस्थीविसर्जन तक और बाद मे death certificate तक सारी व्यवस्था सुखांतद्वारे कि जाती है. खास बात ये है कि श्मशान मे श्रद्धांजली के वक्त मृतक के जिवन पे बनी videofilm द्वारा उपस्थित लोगो को और नई पिढी को अच्छा संदेश दिया जाता है. जिसने ये मोक्ष प्लान खरीदा है उसके पसंद कि उसिकी फोटो फ्रेम उसके रिलेटिव्ह को दि जाती है. अगले तीन साल तक उसकी जयंती और पुण्यतिथी सुखांतद्वारा मनाई जाती है.
    जो लोग चाहते है कि अंतिम संस्कार उनके मर्जि से हो और उनके रिलेटिव्ह को कोई तकलिफ ना हो वो लोग ये प्लान ले सकते है. जो पच्चास साल के उपर हो, जिनके बेटे परदेस में सेटल हो गये है, जिनके कोई बेटे नही, जो अकेले रहते है, जो सधन है लेकिन ऐसी विधी करना नही जानते ऐसे लोग ये सेवा ले सकते है.
     इस तरह से ये  funeral business करके आप business के साथ साथ लोगो कि सेवा भी कर सकते हो और मानवता धर्म भी निभा सकते हो और समाज कि सेवा भी कर सकते हो.




सत् विचार मोती

 वो ज्ञान ही क्या जिस से सिर्फ जिवनकाल चले, ज्ञान तो वो जिस से मानवजन्म का उद्देश सार्थ हो.

Sunday, 9 December 2018

December 09, 2018

5s implementation plan in business as well as in our personal life

         

 5s implementation plan - जो लोग किसी कंपनी में employee है या रह चूके है वो तो  5-S के बारे मे जानते होंगे और जो नही है वो आज जान जायेंगे. किसी भी business मे 5-S implimentation का असाधारण महत्व है. जिस से time की बचत होती है, wastage कम होता है, safety बढती है, men और machine  की efficiency बढती है. all over company की growth होती है.

    Japan के Sakichi Toyado उनके बेटे Kiichiro और Taiichi Ohno जो की Yoyato के engineer थे उन्होने ये 5-S प्रणाली का निर्माण किया.
                                     
                                                 




                     5-IMPLIMENTATION PLAN

 5-S क्या है??

1)Seiri (Stucturise)-अनचाही चिजें बाहर निकालना.
2)Seiton(Systematise)- जरूरत की चिजे काम के क्रम के अनुसार रखना.
3)Seiso(Sanitise)-अच्छी से सफाई करना.
4)Seiketsu(Standardise)-उपर तिन्हों प्रणाली का अवलोकन करना.
5)Shitsuke(Self Discipline)-5s प्रणाली दुसरे लोगो को सिखाना.

1)Seiri (Stucturise) - इस process हम हमारी काम की जगह पर जो बिना उपयोग कि वस्तू है उसे बाहर निकाल देते है.जिससे आवश्यक वस्तू के लिए जगह बन जाती है.वस्तू कम होने से disturbance भी कम होता है.वस्तू ढून्ढने के टाईम मे बचत होती है. सुरक्षा हेतू भी ये लाभदायक है.
   इस process मे सब वस्तू चेक कि जाती है. उसके आवश्यकता के अनुसार उसका मुल्यांकन होता है. जो अभी उपयुक्त नही लेकिन बाद मे उपयोग मे आनेवाली है उसे red tag area मे डाला जाता है.

2)Seiton (Systematise) - इस activity मे काम कि लगनेवाली चिजों को उसके उपयोग के क्रम के अनुसार लेबल लगाकर रखा जाता है. जिस से उसका उपयोग और जगह स्पष्ठ होती है.
   इस से काम करने कि क्रिया सुलभ होती है.इस से उस वस्तु को ढूंढ़ने में आसानी होती है.वस्तु खोने से बचती है.और काम होने के बाद वस्तु अपने जगह पर रखी जाती है.

3)Seiso(Sanitise) - काम की जगह अच्छी तरह सफाई करे.
   अच्छी सफाई से काम कि जगह और मशिनों को बार बार चेक किया जाता है. इस से चिजे खराब होने से बचती है. सुरक्षितता बढती है. काम करने के लिए मन को प्रोत्साहान मिलता है. product कि quality भी improve होती है.

4)Seiketsu(Standardise) - कार्य स्थल का और कार्य प्रणाली का  standardisation किया जाता है. उपर कि तिन्हो process योग्य तरह से चले इस के लिए इक मानक बनाए. कि उपर कि process का कभी खंडन न हो और वो परीपूर्ण प्रक्रिया से चलता रहे.
   सब प्रक्रिया योग्य तरह से चल रही है इसके लिए फोटो और visual control का प्रयोग किया जाता है. इस के योग्य परीणाम के लिए audit checklist का प्रयोग किया जाता है. हर इक employee को अपने जिम्मेदारी से अवगत किया जाता है.

5)Shitsuke(Self Dicilpline) - इस मे 5-s process को  अपने daily work कि आदत बनाई जाती है और दुसरे लोगो को follow करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.
  5-s training session का आयोजन किया जाता है. regular audit कर के ये तसल्ली कि जाती है 5-s process योग्य तरह से चल रही है. जब जरूरत हो तब नया बदलाव लाए उसके employee का सहयोग बहोत महत्वपूर्ण होता है. जब भी कोई issue हो वो दुबारा न हो इसके लिए जो बदलाव जरूरी होता है वो करे.

                                   "5-s implementation in start-up business"

      आप इस process को start-up के लिए भी use कर सकते हो.

1)Seiri ( Stucturise ) - जब आप कोई business plan   कर रहे हो तो सबसे पहले अपने मन में आनेवाले negative विचारों को मन से बाहर कर दो.

2)Seiton ( Systematise ) - जब भी आप के मन मे कोई अच्छा business idea आता है तो उसके implementation का इक systematic business plan बनाओ कि पहले कोन सी चिज करनी है और उसके बाद कोनसी चिज करनी है. बाद मे करनी वाली चिजों को कही लिखकर रखिए क्यों कि वो आपको याद रहे. इस के लिए आप एक notebook उपयोग कर सकते है.

3)Seiso ( Sanitise ) - अपने मन को positive विचारों से साफ करो. आनंदी रहो. motivational stories पढो. बडे बडे businessman की biography पढो जिस से आप के मन को प्रेरणा मिले.

4)Seiketsu ( Standardise) - उपर के तिन्हो प्रक्रिया का खंडन न हो इसका ध्यान रखे.उसके लिए आप अपने कमरे मे इस का इक chart बना के रख सकते है जिस पर आप कि नजर बार बार पडे.

5)Shitsuke ( Self Dicipline ) - आप अपने दिमाग को इक employee समज कर खुद train करे ये चिजे करने के लिए. हर इंसान के दिमाग में अच्छे अच्छे ideas आते है. अपने हिसाब से आप इस में बदलाव भी कर सकते है.

                                     "5-s implementation in our personal life."


1)Seiri ( Stucturise ) - अपने मन में आनेवाले बुरे विचारों को मन से बाहर कर दो. जैसे गुस्सा, लालच,शक करना, किसी का बुरा चाहना,किसी बात कि बहोत ज्यादा चिंता करना.जिस से आप के मन में अच्छे विचारों जगह मिलेगी.

2)Seiton ( Systemasation ) - इसे में जो अच्छे विचार है उन्हें प्रथम स्थान दो जैसे किसी कि मदत करना, लोगो से अच्छा बर्ताव करना, दान-धर्म करना आदी अच्छे विचार मन में आयेंगे तो बुरे विचार मन मे आयेंगे नही.

3)Seiso ( Sanitise ) - इस में आप अपने मन को साफ करो जिसके लिए आप भगवान के नाम का जाप करो,भजन किर्तन करो,धार्मिक ग्रंथ पढो और अपने मन को साफ और निर्मल बनाइए.

4)Seiketsu (Standardise) - मन ही मन में ऐसा मानक बनाइए कि उपर लिखे तिन्हों गतविधीयों का खंडन न होने पाए.इसके लिए आप मन ही मन में सही चिजों का चित्र बनाइए. उस पर सुधार लाए.

5)Shitsuke ( Self Dicipline ) - आप ही अपने मन को अच्छी चिजें करने के लिए प्रशिक्षित करो.मन को हमेशा अच्छे कर्म करने के लिए प्रोत्साहित करो.  हमारे बर्ताव में कितना सुधार आया है,हमारा बर्ताव पहले कैसा था और अब कैसा है इसका अवलोकन भी करो.अच्छे कर्म करने के लिए खुद ही वचनबद्ध हो जाओ.
     सच मे आपको इक अलग अनुभूती होगी. आप के मन को शांती मिलेगी.

  Motivational Thoughts

     किसी भी इंसान कि हार या जित दो बार होती है. पहले मन में फिर मैदान मे. आप सोचोगे कि आप जित जाओगे तो आप जित ही जाओगे,आप सोचोगे आप हार जाओगे तो आप हार ही जाओगे.Success कि शुरूवात हमेशा मन से होती है. बलवान कि हमेशा जित नही होती, जित होती है किसी भी इंसान कि प्रबल इच्छाशक्ती की.



Friday, 30 November 2018

November 30, 2018

कैसे करे Agritourism business और कमाए लाखो रुपये (start new business)

  Agritourism-देश के किसान के लिए agritourism याने खेती पर्यटन इक बहोत फायदेमंद साईड buisiness है. अपने देश की खेती देखने एवं उसका अभ्यास करने बहोत से विदेशी तथा देसी पर्यटक interested होते है.
  Agritourism सारे दुनिया में होता है. खासकर Australia,Canada,United States,Italy,New Zealand,Brazil,Philippines इन देशों में ये ज्यादा होता है. अलग अलग देशों ये अलग अलग नाम से जाना जाता है. इसे farm-stay भी कहते है.


कैसे करे Agritourism business और कमाए लाखो रुपये


                     Agritourism in India


  हमारे देश में 2004 को इसकी शुरूवात हुई थी. पांडूरंग तावरे नामक व्यक्ती ने जो की महाराष्ट्र के बारामती के रहने वाले है. जिसके लिए उन्हे भारत के माननिय राष्ट्रपतीद्वारा National Tourism Award भी दिया गया था.
  Agritourism का मतलब है किसी टुरिस्ट लोगो को अपने खेती में रूकाना और उनको खेती कि जानकारी के साथ natural चिजें जैसे पेड पौधे तथा वनऔषधी के बारे अवगत कराना और घर जैसा देसी खाना खिलाकर रेस्टोंरेंट जैसी सुविधा देना.
  आज कल लोग शहर कि शोर शराबेवाली fastlife जी के बोर हो जाते है. शहर कि हवा भी fresh नही होती. ऐसे में हमेशा शांत और एकांतवाली natural climate वाली जगह ढुढँते है जहा उनके मन को शांती मिले. यही लोग आपके costumer होंगे. आजकल ये ट्रेन्ड भी है की weekend पे किसी फ्रेन्ड कि farmhouse पे जाकर थोडासा relax होने का. ऐसे मे कोई किसान इस idea को अपने खेत में professionally चालू करे तो उसका इक अच्छा खासा side business हो सकता और आमदनी बहोत अच्छी हो सकती है. बस tourist को अच्छी सुविधा देने कि जरूरत है.
    आजकल के शहरी बच्चों अगर पूच्छा जाय कि दाल चावल सब्जी कहा से आती है तो वो जवाब देंगे कि mall आती है. उन्हे खेती, किसान, चुल्हा,गाय-भैस का तबेला के बारे मे जानकारी ही नही होती. लेकिन उनको जानने जिज्ञासा होती है. हम जो खाना खाते है उसके लिए किसान को कितनी मेहनत करनी पडती ये अगर आज कि पिढी जान जाए तो शायद वो सब्जी खरीदते वक्त तोलमोल ना करे. किसान के प्रती उनका आदर बढे. ये भी इक अच्छा उद्देश है इस business के पिछे. हम जो खाना wastage करते है उसकी सही किंमत उनको पता चले. और बडे होकर शायद वो किसान कि समस्याओं पर गंभीर विचार करें.




  कैसे करे Agritourism business



  • अपने देश कि संस्कृती है,'अतिथी देवो भवः' याने के आप का पहला काम है टुरिस्ट को भगवान मानकर उस के साथ घर के  सद्स्य जैसा व्यवहार करे. बस यही पे आपका आधा काम हो जाता है.
  • किसी भी business कि marketing बहोत जरूरी होती है. उसके लिए आप आपके इस business कि जोर शोर से advertisement करे pamphlets छपवाए,banner लगवाए,mobile use करे,what's up का use करे, Facebook page बनवाए, news paper,magazine में advertise करवाए जितनी हो सके उतनी advertise किजीए.
  • अलग अलग business strategies आजमाए जिस पर मै पहले post लिख चुका हूं.
  • हो सके उतना अपने खेती मे नयापन लाए और modern तरीके से खेती करे लेकिन natural  चिजों को हानी न पहूंच पाए.
  • कस्टमर को वो सब facility available करें जिनकी उन्हें आदत हो जैसे swimming pool,modern washroom.
  • खुद उनके लिए ज्यादा से ज्यादा available रहे. खेती के बारे मे उन्हें ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे. जैसे जमिन के जोतने से लेके माल कि डिलीव्हरी तक. साथ साथ पेडो,पौधो और औषधी वनस्पती की भी जानकारी दे. प्राणी, पक्षी आजूबाजू के भौगोलिक एरिया का भी ज्ञान दे.
  •   उनके लिए specially चूले पर बनाया हुआ खाना दे जो कि आजकल इक ट्रेंड है.
  •   सबसे महत्वपूर्ण बात उनको उनके मर्जि के हिसाब से privacy दे.
  •   इस business के लिए loan proposal भी होता है. इसके लिए आप को इक अच्छा सा project report बनाना पडेगा. इस में documentation perfect होना चाहिए. खेती और जमिन के related जितने भी दाखिले एवं authorities जरूरी होते है वो होने चाहिए. इस business  मे आप को स्विंमीग पूल, मछली तलाव, रोड बनाना, किचन का सामान, पाणी कि टंकी, पाईप लाईन, काॅटेज बनवाना, बैलगाडी, गार्डन इंस्ट्रूमेंट इन सबके लिए loan मिलता है.


  वैसे ये कल्पना बाहरदेश कि है लेकिन अपने देश कि natural beauty भी अव्वल और अप्रतिम है. अपने देश कि 65% जनता देहाती गाव में रहती है और खेती करती है. शहर में रहने लोगो को अपनी गाव के लिए इक अलग सा emotionally रिश्ता होता है. लेकिन खेती के लिए किसीने कभी कोई ठोस कदम नही उठाया. देश की जनता का पेट भरनेवाला पहला आदमी आत्महत्या के राह पर चल पडा और   जहा जरूरत नही वहा हजारो करोड खर्च होते रहे. अब किसान को भी इक businessman बनना पडेगा. इस business के साथ वो अपना खेती माल आनेवाले टुरीस्ट लोगो को अपने दाम पर बेच सकता है उसे एजेंट कि जरूरत नही. इक अच्छे planning के साथ ये side business किया जाय तो हमारा किसान भी अच्छे पैसे कमा सकता है.
        जय हिंद.
   



     BUSINESS THOUGHT

"इक देहाती आदिवासी गाव मे दो buisinessman कपडे बेचने गये.वहा के लोग सिर्फ इक कच्छा लपेटेने के सिवा और कोई कपडा नही पहनते थे. पहले buisiness man ने सोचा 'यहा मेरा buisiness  नही चलेगा' दुसरे buisiness man ने सोचा 'अरे वा यहा कोई ज्यादा कपडे नही पहनता यहा मेरा business बहोत चलेगा'.
  इस से ये सिख मिलती है,कि आपके business का success आप के attitude और positive thinking पर depend करता है."

     सत् विचार मोती
 
   "पूरे संसार मे ज्ञान जैसी पवित्र ना कोई वस्तू ना कोई तत्व. ज्ञान ही ईश्वर है."
 
   

Wednesday, 28 November 2018

November 28, 2018

CROWDFUNDING- STARTUP BUSINESS KE LIYE SANJIVANI

  CROWDFUNDING
   Crowdfunding इक छोटे से  start-up business के लिए संजिवनी साबित हो सकता है. इसके फायदे भी अनेक है. Crowdfunding की जानकारी बहोत कम लोगों को होती है इसलिए इसके related कुछ बाते आज हम जानेंगे.
   Crowdfunding मतलब किसी इक उद्देश के लिए लोगो के समूह से पैसा इकठ्ठा करना. इस मे हम जानते है की हमारा पैसा किसे और क्यो दिया जा रहा है.
                                                  
crowdfunding-startup business ke liye sanjivani
   
                                 Crowdfunding for startup buisiness

    वैसे हम Crowdfunding से अज्ञान नही. जाने अनजाने मे हमने कई बार Crowdfunding की होगी. हमारे समाज मे इक दुसरे कि मदत करने का रिवाज है. जैसे हम किसी के शादी मे या बर्थ डे मे जाते तो उसे प्रेझेंट पाॅकेट में पैसे देते है ये हो गई Crowdfunding. दो-चार दोस्त मिलके अपने किसी दोस्त की पैसे के रूप मे मदत करते है ये भी इक Crowdfunding है. हम कोई cultural program के चंदा देते है वो भी इक Crowdfunding है. कोई कलाकार या सेलीब्रेटी किसीके मदत के कोई program करता है और हम उस मे contribution देते है वो भी इक Crowdfunding है.हम जो भीसी लगते है वो भी crowdfunding का ही प्रकार है.

   अमेरिका मे 2012 मे ऐसे ही contribution को business के लिए उपयोग मे लाने की प्रथा शुरू हुई उसका फायदा बहोत सारे start-up business को हुआ और सारे युरोपिय देशो ने उसे आपनाया. अब धिरे धिरे ये अपने भारत मे शुरू हो रहा है.
   शेअर मार्केट भी इक Crowdfunding का ही प्रकार है. इस  मे बहोत से प्रकार है. इसको बनाने तीन मुख्य step है. 

1)Project Initiator - इसका काम है इक अच्छा project बनाना.
2) Supporters - ये इक  group होता है. जो लोगो को project के जानकारी देता है और project को support भी करता है.
3) Platform - इसके जरीये project लाॅन्च होता है और लोगो के सामने सही तरीके से पेश होता है.

#1.Reward-based Crowdfunding - ये start-up business के लिए सबसे अच्छा है. मानलो कोई नया business start करना चाहता है और उसे पैसो की जरूरत है. तो चार-पान्च लोग मिलके उसमे invest करेंगे तो जो फायदा होगा वो सब मे reward  के रूप मे बाटा जायेगा. मान लो कोई  e-commerce business या फिर  website बनाने का business चालू करना चाहता है. उसे 50 हजार की जरूरत है, तो दस लोग अगर 5-5 हजार कि investment करते है तो उनको 5 हजार मे website बना के मिलेगी जिसकी मार्केट price 10 हजार होगी तो उन 10 investor  का 5-5 हजार फायदा हुआ और business   चालू करनेवाले का business  भी चालू हो गया और उसे कही बाहर से ब्याज पे पैसे भी नही लेने पडे. इसे preset investment भी कहते है.

#2. Equity-based  Crowd funding - इस मे ज्यादा पैसा invest किया जाता है ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए. अपने देश मे इसे युज करने का  permission नही. लेकीन SEBI इसे निर्देश के अनुसार इस मे invest किया जा सकता है.

#3. Donations-based Crowd funding - इस मे आप अपने मर्जी के हिसाब से पैसा invest कर सकते है. लेकिन इस मे आप को कोई reward या return नही मिलता. ये इक दान पुण्य का काम है. ये ज्यादातर चेरीटी के लिए होता है.

#4.Debit-based Crowd funding - ये इक तरह का लोन होता है जो आप किसी कंपनी को देते हो. अगर फायदा हुआ तो इक particular ब्याज के साथ आपको आपका पैसा वापस भी मिलता है लेकिन कंपनी का घाटा हुआ तो आप का भी घाटा हो सकता है. इस मे रिस्क जरा ज्यादा होती है.

 #5.Public Private Partnership[ PPP] - ये इक equity based crowd funding का ही रूप है. अपने देश मे ये ज्यादा इस्तेमाल होता है शेअर मार्केट मे.

    Internet पर बहोत सारे platforms और websites है जिनके आधार से आप Crowd funding मे investment भी कर सकते है और उसका लाभ भी उठा सकते है अपने business के लिए.

    मेरी ये पोस्ट आप को कैसी लगी ये मुझे जरूर कमेंट करके बताये अगर इस मे कोई कमिया है तो भी तो भी मुझे सुचित करे.    
धन्यवाद.





  सतविचार मोति 

" प्रणाम का परिणाम हमेशा आशीर्वाद ही होता है."