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Friday, 8 March 2019

March 08, 2019

World Womens Day


World Womens Day


 हर साल 8 मार्च को पुरे दुनिया में  'World Womens Day' मनाया जाता है. इस दिन पुरे दुनिया मे महिलाओं के प्रती प्रेम, आदर व्यक्त किया जाता है. हर साल इक अलग थीम होती है.

  इस साल की थीम है. " Think Equal, Build Smart,Innovate for change."

World Womens Day


   1st Womens Day

   1909 मे United State मे 28 Feb. को पहिला महिला दिन मनाया गया था. लेकिन 1975 मे United Nation ने इक थीम के साथ ये womens day मनाने का रीवाज चालू किया. उस साल उनकी थीम थी,"Celebrating The Past,Planning For Future."

     1917 मे रशियन महिलाओंने अपने वोट के हक को पाने के लिए महिला दिन का निषेध किया था. उसके बाद उनको उनका वोट का हक दिया गया था.1918 UK में तीस महिलाओं को वोट का हक दिया गया था जिनके पास उनकी खुद की प्राॅपर्टी थी.

     1975 को "Red Letter Year" नाम से जाना जाता है. क्यों कि इस साल United Nation ने " World Womens Day" को officially मान्यता दि थी. इसके बाद 8 March को ' world womens day' सारी दुनिया में सेलिब्रेट होने लगा. इतिहास में जब भी महिलाए अपने हक के लिए लढी. उन्होंने purple colour इस्तेमाल किया है. ये कलर Gender Equality का भी प्रतिक है. इसलिए उनकी थीम purple colour में होती है.

   आज हम इस दिन को भी इक सेलिब्रेट दिन की तरह सेलिब्रेट करते है. whats up शुभकामनाए भेजते है. बस हो गया womens day सेलिब्रेशन. कभी इक दिन अपने घर कि महिला चाहे वो माॅ हो, बिवी हो,बहेन हो या भाभी हो किचन से छुट्ठी दे दो और सब काम आप खुद करो. उनको उनका मनचाहा काम करने का मौका दो. बडे से बडे मसले मे उनकी सलाह लो,उन के मनचाही जगह पर उनको घुमाने ले जाओ. उस दिन सई मायने मे महिला दिन सेलिब्रेट होगा और आप को भी अच्छा लगेगा.

   आज भी हमारे देश में दहेज का रिवाज पुरी तरह से खत्म नही हुआ है. इतने सख्त कानून होने के बाद भी लोग चोरी छुपे दहेज देते भी है और लेते भी है उनके खिलाफ आवाज उठाओ. कोई आदमी दारू पिकर रस्ते पर अपने पत्नी को पिठता है उसे रोकने कि कोशिश करो. रोड रोमिओ जो आते जाते महिलाओं छेडते है उन्हे रोकने कि कोशिश करो. तभी womens day  का कुछ अर्थ बनता है.

    आज बहोत सारे क्षेत्र में महिलाए दिखाई देती है. यह एक अच्छी बात है. पहले से आज बहोत ही ज्यादा महिलाए सक्षम और स्वतंत्र दिखाई देती है वो हर एक क्षेत्र और आगे बढे और तरक्की करे यही हमारी शुभ कामनाए.
 जय हिंद.
   






Sunday, 3 February 2019

February 03, 2019

Indian Inspiring Personalities -Uddhab Bharali

  Indian Inspiring Personalities -Uddhab Bharali 


   हाय फ्रेन्डस आज हम अपने देश के ऐसे talented मेहनती और सत् विचारक तथा वैज्ञानिक और Inspiring Personality के बारे में जानेंगे जिनके नाम पे 39 National Petaint  है और उन्होंने 118 अलग अलग product बनाये है.

   उनका नाम है श्री. उद्धब भराली. वो आसाम के लखिमपूर के रहनेवाले है. कुछ महिने पहले ही उद्धबजी को नासा (NASA) ने NASA Exceptional Technology Achivement पुरस्कार से सम्मनित किया है. इसके अलावा President Grassroots Innovation Award और Shristi Samman Award  तथा पद्मश्री पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है.

Inspiring Personalities

           Inspiring  Personalities -Uddhab Bharali


  उद्धबजी बचपन से ही होशियार थे. जब वो स्कूल मे थे तो उनको 3rd स्टॅन्डर्ड से 5th स्टॅन्डर्ड मे और 5th स्टॅन्डर्ड से 10th स्टॅन्डर्ड मे दाखिला दे दिया गया था.उनको गणित विषय मे ज्यादा रूची थी. वो जब स्कुल मे तभी 11th और 12th की maths की problem solve करते थे. आगे उन्होंने जोरहाट के Engineering colledge मे दाखिला ले लिया लेकिन पैसे के कमी के कारण उन्हें वो बिच मे ही छोडनी पडी. घर कि जिम्मेदारी भी उन पर थी और यही से उनके अंदर का inventor जाग गया.

    1988 मे उनके पिताजी के उपर अठरा लाख का कर्ज था और चुकाने कि जिम्मेदारी उद्धब सर कि थी. कितनी भी अच्छी नोकरी करके इतना बडा कर्जा उतारा नही जा सकता ये बात उद्धब सर जानते थे. उसी वक्त आसाम की चाय कंपनी को पाॅलिथिन बनानेवाली इक मशिन की आवशक्ता थी. उसकी बाहरी देश की बनाई गयी मशिन की किमत लाखो रूपये थी.उद्धब सर ने ये challenge स्विकार लिया. 5 लाख किंमत कि वो मशिन उद्धब सर ने सिर्फ 67000 मे बनाई. उसके बाद इक के बाद इक अच्छे अच्छे प्राॅडक्ट बनाते गये.

   2005 मे National Innovation Foundation ( NIF ) Ahmedabad  ने उद्धबजी के प्राॅडक्ट की सरहाना की.उसके बाद उन्होंने पिछे मुडकर नही देखा.

   उन्होंने खेती के लिए इस्तेमाल होनेवाले औजार बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया. लहसून जेट्राफा सफेद मुसली को छेद करनेवाली पिलर मशिनें बनाई. उनकी मशिनों की खासियत ये थी कि देशी बनावट की सस्ती और इक आदमी से चलनीवाली मशिने थी. उनका सबका famous innovention था Pomegranate de-seeder याने आनार छिलने का मशिन. आनार छिलनेवाला मशिन बनाने का प्रयास अमेरिका के इंजिनिअर्स बहोत साल से कर रहे थे से कर रहे थे लेकिन सक्सेस नही हो रहे थे जब ये बात उद्धब सर को पता चली तो उन्होंने ऐसी मशिन बनाने का निश्चय किया.आसाम मे आनार आसानी से नही मिलते वो लाने के लिए उन्हे 500 किलोमिटर जाना पडता था. लाखो प्रयासो के बाद आखिरकार उन्होंने आनार छिलने की मशिन बना ही ली. इसी यंत्र को NASA और MIT जैसे बडे Organisation ने नवाजा और फिर उद्धब national level पे  famous figer  बन गये.

     आनार छिलने के मशिन के बाद सुपारी छिलने का मशिन और चाय पत्ती से पावडर बनाने का मशिन (CTC ) अपाहिज लोगों के लिए Mechanism toilet ये उनके बनाये गये Famous मशिनें है.

   उनकी इक खास बात ये है कि इतने सारे invention करने के बाद भी ये मशिने उन्होंने जरूरतमंद लोग और किसानो को मुक्त मे बाट दी. वो चाहते तो इन मशिनों का commercial production करके करोडो रूपये कमा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया. बल्की जो कंपनीया उनके product बनाती है उनसे वो royalty लेते है ताकि घरखर्चा और invention खर्चा चल सके.

     हमारे देश मे ऐसे कितने talented लोग है जिन्हे हमारी जनता जानती भी नही होगी या तो बहोत कम जानती होगी. मेरी पिछली इक पोष्ट zero budget kheti business मे मैने महाराष्ट्र के श्री. सुभाष पालेकरजी बारे मे लिखा था ताकी लोग हमारे देश के talent को जाने.

    ऐसे इस सत् विचार और जागतिक किर्ती वाले इंसान हमारे भारत देश के पुत्र है इस पे हमे स्वभिमान होना चाहिए.

  जय हिंद.
     

Friday, 25 January 2019

January 25, 2019

Ramayana Story- Untold Story Of Ramayana For Life Changing


  हमारे धर्मग्रंथ Ramayana Story अपनी रोज के व्यवहारों के लिए बहोत ही मार्गदर्शक है. जो हमें जिवनमुल्य सिखाते है तथा अपने आचरण एवं विचारों को शुद्ध बनाते है. इस पोष्ट से हम इन्ही सब बातो का विवरण करेंगे. आज हम ऐसी ही इक Ramayana Story जानेंगे जो शायद आपने कभी पढी नही होगी.
    
   कोई भी चिज पाने के लिए पुण्य का होना जरूरी है. और पुण्य पाने के लिए सत् कर्म, सत् भगवत भक्ती और सत् विचारों की आवशक्ता है.
 Ramayana Story- Untold Story Of Ramayana For Life Changing

Ramayana Story - पुण्य का महत्व.


रावण सिताजी  को हमेशा पाना चाहता था. लेकिन रावण के उतने पुण्य नही थे कि वो सिताजी को पा सके. रावण बहोत शक्तीशाली तथा धनवान था. लेकिन पुण्य उसके पास बिलकुल भी नही था. लेकिन श्रीराम खुद पुण्य स्वरूप थे. जिनको देखने से ही पुण्य मिलता था. सिताजी भी श्रीराम कि भक्त थी.

    जब श्रीराम सिताजी को लाने अपने वानरसेना के साथ लंका गये. तो श्रीराम और रावन के बिच युद्ध चल रहा था. इधर आयोध्या में श्रीराम के वियोग से उनके पिता राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिये थे. क्रियाकर्म और अस्थी विसर्जन का कार्य सबसे बडे बेटे होने के कारण श्रीराम करे  ऐसे भरत और शत्रूघ्न दोनो भाई चाहते थे.

   क्रियाकर्म के लिए ब्राम्हण की जरूरत थी. ये बात रावण की  पत्नी मंदोदरी को पता चली. मंदोदरी जिसका नाम सात पतिव्रता स्रियों मे लिया जाता है,जिसका पुण्य  और भगवत भक्ती सिताजी के समान थी. उसने ये कार्य रावण के हातो से कराने की सलाह श्रीराम दी. रावन जैसा भी था लेकिन वो इक दशग्रंथी ब्राम्हण भी था वो ये कार्य कर सकता था. और मंदोदरी ने ये भी सोचा कि श्रीराम को नजदिकी से देख के रावण शायद ये जान जाय की श्रीराम भगवान विष्णू के अवतार है.

   रावन भी अपना ब्राम्हण धर्म निभाने के लिए तैयार हो गया. सबकुछ विधीनुसार हुआ. जब दक्षिणा देने का समय आया तब श्रीराम बोले,'हे रावण तुम्हे दक्षिणा में क्या चाहिए तो रावण ने कहा कि, ' मै लंकाधिपती हूं मेरी लंका सोने की है. सभी देवी देवता मेरे वश मे है. हे राम तुम इक साधारण मानव हो. तुम्हारे पास मुझे देने के क्या है. लेकिन दक्षिणा में मुझे कुछ देना हि चाहते हो तो मुझे सिता दे दो.'
   ये सुनते ही लक्ष्मण,भरत,शत्रूघ्न और सारी वानरसेना क्रोधित हो उठी. लेकिन श्रीराम ने उन्हें रोका और उन्होंने रावण से कहा, 'हे रावण जिस सिता की तुम बात कर रहे हो वो तो पहले  ही तुम ले जा चुके हो. आज तुम्हे देने के लिए मेरे पास सिवाय इस पाणी के कुछ भी नही.' ऐसा कह के वो पाणी से भरा कमंडल रावण के हाथ मे दे देते है. रावण भी बडे अंहकार से वो कमंडल लेके लंका चला जाता है.

   वो लंका जाता है लेकीन राजभवन जाने के बजाय वो अशोक वाटीका मे जाता है जहा सिता माता होती है. वो पाणी से भरा कमंडल जो श्रीराम ने दिया था वो सिता माता को देकर वह कहता है, ' हे सिता देखो तुम्हारे राम ने मुझे दक्षिणा मे क्या दिया है सिर्फ पाणी और फिर भी तुम उस निर्धन की पत्नी बनकर गर्व महसूस करती हो. मुझसे विवाह करो और लंका कि महाराणी बनो.' और रावण वहा चला जाता है. सिता माता सिर्फ हसती है. क्यो कि सिता माता को ही पता था उस कमंडल मे क्या है.

    दरअसल श्रीराम ने अपनी सारे पुण्य उस कमंडल मे डालकर रावण को दिये थे जिसकी वजह से श्रीराम श्रीराम थे. अगर वो पुण्य रावण को मिल जाते तो रावण भी श्रीराम बन सकता था और अगर रावण राम बन जाता तो सिता को पाना उसके लिए सहज संभव था. लेकिन ऐसा हुआ नही क्यो रावण उस  पाणी से भरे कमंडल को पाणी ही समजा था. लेकिन सिता माता जानती थी की उस कमंडल में क्या है इसलिए वो हंस पडी थी.

       हम ही है वो अहंकाररूपी रावण


     हम रोज भगवान से कुछ न कुछ मांगते रहते है लेकिन हमारे रोजमर्रा के जिंदगी ऐसे कितने अवसर आते है जब हमें भगवान बहोत कुछ दे जाते है लेकिन हमे समज मे भी नही आता की हमे क्या मिला है. वो समज ने के लिए पुण्य का होना बहोत जरूरी है और पुण्य तो भगवत भक्ती,सत् विचार, सदाचार और राम नाम में ही है. आज तक ऐसा हुआ नही कि हम भगवान से कुछ मांगे और भगवान हमे ना दे. बस पुण्य का होना बहोत जरूरी है. भगवान जो देते है और जिस रूप मे देते है इसकी पहचान बहोत आवश्यक है. लेकीन हम हमेशा अहंकाररूपी रावण जैसा बर्ताव करते है और इक नारियल तोडकर भगवान को दस इच्छा पुरी करने को बोलते है. नारियल जो कि भगवान ने ही बनाया है. धरती की सारी चिजे तो भगवान ने ही बनाई है. ऐसी कोनसी वस्तु है जो हमारी है और हम भगवान को दे सकते है?.
 
  टिप - इस कहानी को किसी भी धार्मिक ग्रंथ का आधार नही है. इस को सिर्फ जिवनमुल्य के प्रती बोध प्रबोध के नजरिया से देखा जाय.
    जय श्रीराम.
     

Friday, 18 January 2019

January 18, 2019

world happiness report 2018

   World happiness report 2018

   India is the most depressed country in the world - WHO

  जी हा WHO के  report  के अनुसार India दुनिया का बहोत ज्यादा depreessed देश है. यहा लोग हमेशा depress रहते है. WHO के इक report के अनुसार पिछले दस साल मे corporate employees मे anxiety और depression  का rate 45-50% बढ गया है. मतलब दो मे से इक आदमी depression का शिकार है. हांलाकी बहोत सारी कंपनिया अपने employees के anxiety और depression के लिए special doctor भी appoint करते है.
   लेकिन ऐसी क्या बाते हो जाती है कि लोग depression का शिकार हो जाते है ? workload और job insecurity ये इक दो कारण छोड के और ऐसे कौनसे कारण है जो इन हालात के जिम्मेदार है. ये बात और है की आज का corporate picture बदल गया है. पहले कंपनी के owner सिर्फ नाम के होते थे असली owner तो employee ही होते थे. owner और employee में  इक अलग relation था.
world happiness report 2018

   इस anxiety और depression का main कारण है. rat-race. जी हाॅ rat-  race. आज इक अजिबोगरीब rat- race लगी हुई है और हमे पता भी नही चलता कि हम इस रॅट रेस का हिस्सा है. आज माॅ-बाप अपने बेटे को Lower KG में डालते है तो उसके कान में बता देते है कि बेटा 12th मे 90% लाना इंजिनिंरीग मे जाना है. बस यही से शुरू है उसकी रॅट रेस. फिर जिंदगी मे हर इक मोड पर अपने को बेहतर बनाने के चक्कर मे वो depression का शिकार हो जाता है. आज हर एक आदमी ज्यादा पैसा,नाम और पाॅवर के पिछे भागता दिखाई देता है. और ये शायद हर इंसान की आदत भी बन गई है और ये सब ना मिलने पर depression आना तो  स्वभाविक है.

    आज social media भी depression का इक अहम कारण है. वैसे social media इक दुसरे से connect रहने के लिए अच्छा माध्यम है लेकिन इसका गलत प्रभाव पडता दिखाई देता है. इसकी वजह से आज कल कि generation physical और ground game खेलना भूल सी गई है. हमेशा mobile और computer पे online रहने के कारण वो physically और mentally कमजोर हो गये है और social media addicted हो गये है.  Facebook,Instagrame, और tweeter पे किसकी सेल्फी और पोष्ट को कितने लाईक मिले, उस से  मुझे कैसे ज्यादा लाईक मिलेंगे? इसकी भी आप को इक  rat-race देखने को मिलेगी. जो आदमी social media पर अपने आप को जितना smart और active दिखाता है उतना वो असल जिंदगी में होता नही. हम उसी को सच मान के नर्वस हो जाते है. कोई इंसान अपने पार्टी की सेल्फीज, नई गाडी की सेल्फीज या फिर किसी बाहर देश के लोकेशन पर खिंची सेल्फीज जब social media पर अपलोड करता है तो हम सोचते है यार इसके life मे कितनी enjoy है हमारे पास कुछ भी नही. social media पर खुश दिखनेवाला आदमी real life मे खुश होगा इसकी कोई गॅरंटी नही. हम हमेशा दुसरे के पास जो चिज है वो पाना चाहते है. वो ना मिलने से नर्वसनेस आता है और वो डिप्रेशन में बदल जाता है.

    United Nation Sustainable Report

       India is not even on the list of top 100 happiest countries out of the list 156. India rank is 133.
    इस साल  UN  के world happiness report के अनुसार 156 देशों मे India का rank 133 है. इक अफगणिस्तान को छोडकर पाकिस्तान,बांग्लादेश,नेपाल,भूटान,और श्रीलंका ये अपने पडोसी देश जो कि development मे हम से बहोत पिछे है,लेकिन happiness मे हम से आगे है. ये report हर आदमी income, social support, health facility, freedom, population, corruption पे बनाई गयी है.

    हर किसी के खुशी के फंडे अलग होते है. बुजुर्ग लोगों को respect देने से या उनके पैर छुने से खुशी मिलती है,यंगस्टर को मोबाईल,बाईक,कार खरीदने से खुशी मिलती है, उनको love वाला प्रपोज accept होने से भी बहोत ज्यादा खुशी मिलती है.किसी को घुमने फिरने से नई नई site seeing से भी खुशी मिलती है. बच्चों को चाॅकलेट,खिलोने तो क्या अपने मम्मी पप्पा को देखने से भी खुशी मिलती है.

    खुशी कही से भी मिलती है बस लेना आना चाहिए. फिर life में ये टेंशन क्यों? ये depression क्यों? ये rat-race क्यों? ये race लगाना ही है तो अपने आप से लगाओ. खुद को दुसरे से बेहतर मत बनाओ. खुद को अपने आप से बेहतर बनाओ.अपनी शर्तो पे जिओ. वही करो जिसमे तुम्हे खुशी मिलती हो.दुसरो की खुशी देखकर उन से race लगाओगे  तो depression के सिवा कुछ नही पावोगे. क्यों कि हर इंसान अलग होता है. सबको सब कुछ नही आता लेकिन किसी को कुछ तो आता है. ये आपका कुछ है ना वही आप कि खुशी है.


   आज सारी दुनिया depression और stress कम करने के लिए योग के पिछे भाग रही है जब कि योग का जन्मदाता है अपना भारत देश. और उसी कि ये हालत है.भगवान का नाम लेने से, सत् विचारों और सदाचार से भी बहोत खुशी मिलती है. बस शर्त यही रहेगी आप को अपना अहंकार त्यागना पडगा. ये अहंकार ही depression का मेन कारण है.राम का नाम लिया तब हमने पृथ्वी पर जन्म लिया,जिंदगी का आखरी सेकंड वही रामनाम हमारे मुख में हो. यही तो है life. बाकि हमने कितना पैसा कमाया,नाम कमाया वो तो साथ नही जानेवाला.
    मै आशा करता हूं कि 2019 के WHO के  report में भारत का depression rate कम हो और UN कि report में भारत दुनिया में सबसे खुशहाल राष्ट्र हो.
   जय हिंद.
                                                                                                                

Friday, 4 January 2019

January 04, 2019

Making a brand name and brand positioning

      Making a brand name and brand positioning - Brand name और brand positioning किसी भी business के लिए बहोत important होता है. business की ग्रोथ के लिए ये बहोत जरूरी होता है.

       मै अपने पहले पोस्ट लिख चूका हू कि किस तरह हमारी industrialization की  branding न होने के कारण हमारी देश कि बनी चिजे international market मे तो क्या अपने देश मे भी टिक नही पाई. तो आज हम देखेंगे brand मतलब होता क्या है.
Making a brand name and brand positioning

Making a brand name and brand positioning


      जनरली start-up business करनेवाले 'Logo' को ही brand समजते है. brand का मतलब किसी भी कंपनी के product पे दिखाया गया लोगो का विश्वास होता है. मतलब कोई नहाने का साबून बोलेगा तो Lux, Pears या Lifeboy  का ही नाम सामने आता है. लेकीन Indian brand की Medimix  भी अच्छा होता है. Lux बडा brand है. लेकिन Medimix का ज्यादातर लोगो को मालूम भी नही रहेगा. जब कि वो इक आयुर्वेदिक बिना केमिकल मिश्रीत साबून है. मै  अपनी पिछली पोस्ट डोमिनोज के बारे मे लिख चूका हू. अगर हम किसी को पुछे कि डोमिनोज किस चिज के लिए फेमस है तो सब जवाब देंगे पिझ्झा के लिए.लेकिन पिझ्झा तो पिझ्झाहट और पापाजाॅन का भी अच्छा होता है, लेकिन डोमिनोज फेमस है 30 मिनट के अंदर डिलिव्हरी करने के लिए. उनका श्लोगन यही है 'खुशियों कि होम डिलीव्हरी', '30 मिनिट में होम डिलिव्हरी.' वो टाईम पे ज्यादा फोकस करते है. उन्होंने लोगो कि जरूरत पर ज्यादा ध्यान दिया. किसी भी business में कुछ अलग करने कि जरूरत होती है. क्योंकि वो बडा brand बन पाये और अपने brand कि market मे इक position बना पाये.
  
   कभी कभी इक अच्छा श्लोगन भी business के लिए game changer साबित होता है. आप दखिए बडे बडे brand का कोई ना कोई श्लोगन या टॅगलाईन जरूर होती है. जैसे,
NIKE - Just do it,
Apple - Think different,
BMW - Altimate  driving machine,
Amul - atterely butterly delicious,
Coca Cola - थंडा मतलब कोकाकोला.
Kingfisher - King of good times.
Mentos - दिमाग कि बत्ती जला दे.
Raymond - The complete man,
Surf excel - दाग अच्छे है.
   ऐसे श्लोगन से कस्टमर के दिमाग मे वो brand फिट बैठता है और वो वही खरीदता है.

LOGO

   किसी भी product का Logo भी बहोत मायने रखता है. Logo आपके business का चेहरा होता है, आपकी पहचान होती है. कभी कभी लोग Logo से ही product के brand कि असली और नकली की परख करते है.

 आजकल आप देखेंगे कि  बडे बडे कंपनियोंने अपने लोगो बदल दिये है. आजकल के कस्टमर के बदलती demand  और उन्हे attract करने के लिए तथा कंपनी के product में जो बदलाव किए गये उनके के प्रदर्शन के लिए नये Logo लान्च किए गये है.
  Logo पाच भागो मे divide होता है.
1) background.
2) size.
3) colour.
4) structure.
5) nature.
   Example के लिए हम amazon लेंगे
1) background - black.
2) size - only 'a''.
3) colour - white/yellow.
4) structure - all side open.
5) nature - all included.

     इस मे दिखाया गया बाण a से z तक जाता है, जिस से वो ये दिखाना चाहते है कि वो सब चिजे बेचते है और black background और white/yellow से वो ये दिखाते है की वो कोई भी भेदभाव नही करते.

     Logo बनाने से पहले वो क्यो होना चाहीए, उस logo से आप क्या संदेश देना चाहते है और किस चिज को टारगेट करना चाहते है ये सब बातों का पहले हि विचार करना जरूरी होता है. ये सब चिजे start-up मे ही क्लिअर होनी चाहिए.

LABAL POSITIONING

    हमारे गाव मे चावल कि खेति अच्छी होती है और यहा पोहा बनानेवाले बहोत सारे लोग है. वो लोग पोहा 40 रूपये kg से इक लोकल  mall मे बेचते है और वो mall वाला 54 रूपये kg से अपना लेबल लगा के लोगो को बेचता है. वो ये नही देखता कि पोहा आता कहा से है. उसको 40 रूपये अच्छा पोहा मिल जाता है बस. लोग भी उसका brand देखकर खरीद लेते है. इसको लेबल पोजिशिंनिग कहते है. ये होते है brand के फायदे.

   आज LG भारत मे नंबर वन होम अॅपलासेंस बनानेवाली कंपनी है. 1997 मे जब LG हमारे देश मे आया था तो उन्होंने कहा था," हम पहले brand बनाते है बाद मे कंपनी डालते है." ये बहोत सोचनेवाली बात है. LG हमारे देश कि कंपनी से ही product बनवाके लेती थी और अपना लेबल लगा के बेचती थी. 2005 मे महाराष्ट्र के रांजनगाव मे उन्होंने पहली खुद की कंपनी बनाई तब LG brand बहोत बडा हो चुका था. लोग आँख बंद करके उस पे विश्वास रखते है. ये होती है brand कि पाॅवर.

   आज जो भी लोग start-up कर रहे उन्हे brand पर बहोत सिरीअसली सोचना चाहिए. branding को daily update करने कि जरूरत होती. चाहे वो किसी भी माध्यम से. advertisement से या promotion से हो  लोगो के मन मे जगह बनानी पडती है.कस्टमर कि demand और उसकी service ये दो चिजे बहोत important होती है. आज आप किसी चिज का start-up कर रहे हो उसमे जो कोई भी बडा brand होगा तो वो बडा brand क्यो है, उसने ऐसा क्या किया कि वो बडा brand बन गया इसका study करना जरूरी है. आप का brand भविष्य मे कैसा होगा उसकी positioning कैसी होगी इसकी शुरूवात start-up मे ही करनी चाहिए.
  




Wednesday, 26 December 2018

December 26, 2018

Indian Market World's Selling Centre

 

Indian Market World's Selling Centre 

आज अपना भारत देश और Indian market सिर्फ बाहरी देश का इक बहोत बडा  market बन के रह गया है. अपने देश के लोग ज्यादातर बाहरी देश brand पसंद करते है, ज्यादातर युवा. बाहरी देश का brand युज करने को वो style और status मानते है. अच्छी पढाई लिखाई कर के वो multinational company मे जाॅब पाना चाहते है. लेकिन खुद का business खुद का Indian brand बनाना ये बहोत कम युवा सोचते.


Indian Market World's Selling Centre



            हम और  foreign brand

   आज का युवा सुबह उठता है तो Samsung,Apple,LG की फोन कि आलार्म से फिर Colgate की toothpest और brush से ब्रश करेगा फिर Gillette के शेवर से शेव करेगा और Dettol का अॅन्टोसेफ्टिक लगायेगा. Lux या pears साबून से नहायेगा फिर Jocky की अंडरविअर पहनेगा Petter England का शर्ट पहनेगा,Blackberry कि पॅन्ट पहनेगा Unilever brand कि कोई चाय या काॅफी पियेगा उसके साथ Britania का ब्रेड या चिज खायेगा नही तो Kellogs या Maggi तो होती ही है नाष्ते मे. नाष्टा करते समय Samsung, LG के LED पर CNBC या BBC या फिर STAR SPORTS या ESPN चॅनल देखेंगे उसके बाद PUMA, ADDIDAS के शूज या Bata के जूते पहनकर  rayban का गाॅगल लगाकर, i10, i20 या कोई और foreign brand कि कार लेकर ऑफिस जायेंगे.ऑफिस मे Apple DELL,LG या SAMSUNG के लॅपटाॅप पे MICROSOFT और GOOGLE के साथ आठ घंटे काम करेंगे शाम को PIZZA या DOMINOZ का Pizza लेके आयेंगे साथ में FOSTER के दो बिअर भी लायेंगे बिअर पियेंगे pizza खायेंगे फिर SONY, SAMSUG ,LG केLED पे CNBC BBC ESPN चेनल देखेंगे.LG, SAMSUNG का AC लगायेंगे और सो जायेंगे फिर सुबह SAMSUNG, LG के फोन के आलार्म के उठ जायेंगे.
   ये है आज के युवावो का दिनक्रम और lifestyle with status. पूरे दिन में हम इक भी वस्तू made in india यूज नही करते और हमारा सारा पैसा brand के नाम पर बाहर देश चला जाता है.( बचा कुचा नेते लोग खा जाते है.) बाहर कि कंपनिया यही अपने देश में हि प्राॅडक्ट बनाती है और यही हमे ही बेचती है और हम इन बाहरी चिजे यूज करने में अपना status मानते है. हम और हमारा देश इक contract manufacturer बन के रह जाते है.





देश के लिए हमे क्या करना चाहिए

   1991 मे भारत मे खुली अर्थ व्यवस्था लागू कर दि गयी जिसके हमे फायदे भी बहोत हुए. industrialization बढ गया,लोगो को रोजगार मिलने लगे हमारा economy स्थर भी बढ गया लेकिन इसके नूकसान भी बहोत सारे है जो अभी दिखाई नही देते.
    पहले Onida और Videocon के TV घर मे होना शान कि बात थी आज Onida और Videocon के TV कोई नाम लेता नही.  उनकी जगह Sony,Samsung और LG ने ले ली है. अॅम्बेसिडर,प्रिमीअर पद्मिनी इन कारों कि जगह Ford,Nissan,Hyundai,Skoda, BMW ने ले लिया.दुरदर्शन कि जगह BBC ESPN  ने ले ली. BAJAJ के प्राॅडक्ट की जगह LG के प्राॅडक्टोने ले ली. मफतलाल के कपडे कि जगह PETER ENGLAND, LEVIS,BLACKBERRY ने ली.
    इस बदलाव के कारण हमारी आर्थिक उन्नती जैसी होनी चाहिए थी वैसे हुई नही. हमारे देश मे हम से हि प्राॅडक्ट बनवाकर अपना लेबल लगाकर हमे ही बेचा जाता है. इतने बडे का बदलाव के कारण तो बहोत सारे है. पहला कारण है हमारी मानसिकता. हमे देसी चिजें इस्तेमाल करने मे शरम आती है और विदेशी चिजें इस्तेमाल करने में हम style और status महसूस करते है. दुसरा मेन कारण यह है कि हमारे businessman अपने business मे कोई बदलाव नही कर पाये,ग्राहकोंकी जरूरतो को नही समज पाये. और अगर समझ पाये तो अच्छी सर्विस नही दे पाये.कोई अच्छी business  strategy नही कर पाये.
    मै उदाहरण के तौर पर micromax mobile का दूंगा. वो दुसरे नंबर का लिड ब्रॅन्ड था लेकिन बाद मे आये vivo,redmi इन कंपनियोंने online, offline और artificial shortage ये strategies अपनाकर micromax mobile को बाहर कर दिया.
   विदेशी कंपनिया भारत के किसी कंपनी को अपना पार्टनर बनाती है और इक बार मार्केट समझ में आने के बाद उसे छोडकर अपना खूद का ब्रॅन्ड मार्केट में लाती है. जैसे के Hero-Honda,Mahindra-Nissan, ऐसे बहोत सारे उदाहरण है.कल वो अलग होंगे और हम ब्रन्ड के नाम पे विदेशी चिजें खरीदेंगे और हमारा made in India ब्रॅन्ड दिखाई भी नही देगा. आज बहोत सारी चिजें China में बनती है लेकिन बेचने के लिए Indian मार्केट मे लाई जाती है. ये तो बहोत ही गंभीर हालात है क्यों कि हमें मिलनेवाला contract manufacturer का पैसा अब China चला गया और हमारा देश सिर्फ खरीदारी करने का मार्केट बन के रह गया है.
    आज जो भारतिय नागरिक business start-up करना चाहते उन्हे मेरा नम्र निवेदन है कि अपने प्राॅडक्ट का brand बनाये. वो सब strategy अपनाये जो बाहरदेश कि कंपनिया आजमाती है. जैसे Dominiz pizza वाले time strategy पर काम करते है. pizza कि आधे घंटे मे delivery करते है. कुछ mobile कंपनिया artificial shortage दिखा के sell बढाती है. अच्छा promotion करती है. cash on delivery,return policy जैसी strategy अपनाती है. customer की मानसिकता study करती है. ये आप को भी करना पडेगा. Samsung जब India में आया तब उन्होंने promotion के लिए आमिर खान को चूना क्यों कि आमिर खान का युवावो में क्रेझ था और वो जानते थे mobile का ज्यादातर use युवा ही करेंगे और देखते ही देखते Samsung India मे popular हो गया. इन छोटी छोटी बातों का आपको ध्यान रखना पडेगा इक बडा brand बनाने के लिए. उसके साथ quality भी विशेष ध्यान रखना पडता है उस मे कोई compromise नही चलता.
   सारे start-up और running businessman लोगो ऐसी कोई मुहीम चलानी चाहिए जिस से हमारे भारतिय लोग हमारी देसी brand  कि चिजे इस्तेमाल करने लग जाय. मानना पडेगा टाटा बिर्ला और Reliance को जो Indian कंपनिया आज भी India कि शान है. India के लोगो को भी मानना पडेगा क्यों कि आज भी उनका LIC पे विश्वास है. SBI आज भी India की नंबर वन बैंक है. बाबा रामदेव स्वदेशी चिजे इस्तेमाल करने के लिए आग्रह करते है. गांधीजीने जो स्वदेसी का आंदोलन छेडा था उसकी आज बहोत जरूरत है. तभी हमारा देश अव्वल नंबर पर आयेगा.
   जय हिंद.

 सतविचारमोती.

  ज्ञान और विवेक दो ऐसी आँखे है जो जिवन के सत्य और आंतरआत्मा दोनो के रूप देख सकती है.




Wednesday, 19 December 2018

December 19, 2018

Funeral Business The business of death

The business model of death

Funeral business 

         याने लोगो का अंतिम संस्कार उनके मरने के बाद उनकी मर्जी के हिसाब से करना. आजकल की fastlife और रिश्तों की दुरी के चलते इसकी जरूरत दिन ब दिन बढती जा रही है
        Humanity आज कि जरूरत है लेकिन आजकल वो कही खो सी गई है. इक इंसान इक कंपनी प्रस्थापित करता है. लेकीन उस कंपनी का उद्देश business कम और  मानवता धर्म निभाना ज्यादा है.
       आज का मानव निहायती स्वार्थी है. अपने मतलब के सिवा वो किसी कि मदत नही करता. इक जमाना था जब लोग गांव में थे रहते इक दुसरे हालात पुछते थे. बहोत दिन कोई इंसान दिखा नही तो उसके हालात पुछने जाते थे. लेकिन आज शहर कि इस fastlife  में बाजूवाले फ्लॅट मे कौन रहता है ये भी हमें मालूम नही रहता. हालचाल पूछना दुर कि बात है. ऐसे में बाजूवाला इंसान मर गया तो हमें पुलिस आने के बाद ही पता चलता है.
       हाल ही में पेपर में न्यूज आयी थी.  मुंबई के पाॅश इलाके में इक बुजुर्ग महिला अपने आलीशान फ्लॅट मे मृत पाई गयी. उसके मरने की खबर पंधरा-बीस दिन बाद लोगों कों मालूम हुई तब तक वो कंकाल बन चुकी थी. उसका बेटा बाहर देश में बहोत बडे औदे पर काम करता है. लेकिन उसे भी खबर नही थी. इस वाकियात इक बात स्पष्ठ है कि इंसान चाहे कितना भी पैसा कमा ले उसके अंतिम संमय में वो पैसा उसके काम आयेगा इसकी कोई गारंटी नही. वही दुसरी ओर  अपने अच्छे समय वो किसीकी मदत करे, कोई भलाई का काम करे, आदमी जोडे वही उसके काम आयेगा.
      आज ये पोस्ट मै इसलिए नही लिख रहा हूं क्योंकि ये इक business है, बल्की इसलिए लिख रहा हूं क्यों कि इक इंसान अगर सच्चे मन से किसी कि मदत करना चाहे और मानवता धर्म निभाना चाहे तो उसके विचार कितने महान हो सकते है और दुसरा उद्देश ये कि इक businessman कि सोच कैसे creative होनी चाहिए. आज ऐसे ही मानवता वादी और crative विचारों वाले इंसान श्री. संजय रामगुडे सर के बारे मे मै कहना चाहूंगा जो कि 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' के founder है. ये कंपनी उन्होंने 2014 मे बनाई थी.
      आज का इंसान सिर्फ पैसे के पिछे भागता है और सिर्फ खुद के बारे मे सोचता है. उसके लिए वो जितना जिम्मेदार है उतने जिम्मेदार शायद हालात भी है. आज प्रायव्हेट कंपनी में जाॅब करनेवालों को खुद बिमार पड जाये तो छुट्टी नही मिलती. तो औरों के सुख-दुख के लिए छुट्टी मिलना तो दूर कि बात है. इसलिए समाज व्यवस्था से इंसान दूर चला जा है. आज कि पिढी अंतिम संस्कार जैसे चिजों से दूर भागती दिखाई देती है.  मरने के बाद इंसान का मानसन्मान कायम रहे इसलिए संजय रामगुडे सर ने इस कंपनी कि स्थापना कि है.
         
Funeral Business



                                      
   संजय रामगुडे सर इक सिनेमॅटोग्राफर है. वाराणसी में वो इक डाॅक्यूमेंट्री फिल्म बनाने गये थे. उन्होंने गंगाघाट पर होनेवालो इंसानों के अंतिम संस्कार किस तरह से होते है वो देखकर उन्हे बडा दुख हुआ. उसी वक्त उनके मन मे इक सतविचार आया और 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' कि योजना शुरू हुई.
     अंतिम संस्कार करनेवाली कोई कंपनी भी हो सकती है ये विचार इक सिर्फ इक creative mind में ही आ सकता है. फिर अपने मित्र के सहयोग से उन्होंने इसका सर्वे किया. बहोत सालो पहले ऐसी कंपनी बाहरदेश मे थी उनका स्टडी उन्होंने किया हजारों लोगो के साथ उन्होंने चर्चा कि. बहोत सारे लोगों के positive replay आये. लोगों की psychology स्टडी करने के बाद किन सेवाओं उन्हें जरूरत है उसका अभ्यास करने के बाद शुरू हुई 'सुखांत अंतिम संस्कार व्यवस्थापन' कंपनी. फिलहाल ये मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में कार्यरत है. थोडे दिनों मे पुरे देश में इसका विस्तार होगा.
     इसके लिए सुखांत ने मोक्ष नाम का प्री-प्लान लाया है. जिस में खरीदनेवाले के ईच्छा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाता है. उसके साथ उसका birthday, marriage anniversary और उसके जिवन के सुनहरे पल सुखांत celebrate करता है.उस आदमी के करीबी दोस्त और रिश्तेदारों को उसके सुख-दुख के क्षण बुलाया जाता है.
    अंतिम संस्कार के लगनेवाली सारी चिजें विधी प्रक्रिया सुखांत के माध्यम से पुरी कि जाती है. किसी आदमी ने मृत्युपूर्व कोई नेत्रदान या देहदान या कोई शरीर के हिस्से कि दान करने की ईच्छा रख्खी हो तो वो भी पुरी कि जाती है. श्मशान मे मृत्यु रजिस्टर से लेके अस्थीविसर्जन तक और बाद मे death certificate तक सारी व्यवस्था सुखांतद्वारे कि जाती है. खास बात ये है कि श्मशान मे श्रद्धांजली के वक्त मृतक के जिवन पे बनी videofilm द्वारा उपस्थित लोगो को और नई पिढी को अच्छा संदेश दिया जाता है. जिसने ये मोक्ष प्लान खरीदा है उसके पसंद कि उसिकी फोटो फ्रेम उसके रिलेटिव्ह को दि जाती है. अगले तीन साल तक उसकी जयंती और पुण्यतिथी सुखांतद्वारा मनाई जाती है.
    जो लोग चाहते है कि अंतिम संस्कार उनके मर्जि से हो और उनके रिलेटिव्ह को कोई तकलिफ ना हो वो लोग ये प्लान ले सकते है. जो पच्चास साल के उपर हो, जिनके बेटे परदेस में सेटल हो गये है, जिनके कोई बेटे नही, जो अकेले रहते है, जो सधन है लेकिन ऐसी विधी करना नही जानते ऐसे लोग ये सेवा ले सकते है.
     इस तरह से ये  funeral business करके आप business के साथ साथ लोगो कि सेवा भी कर सकते हो और मानवता धर्म भी निभा सकते हो और समाज कि सेवा भी कर सकते हो.




सत् विचार मोती

 वो ज्ञान ही क्या जिस से सिर्फ जिवनकाल चले, ज्ञान तो वो जिस से मानवजन्म का उद्देश सार्थ हो.